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बांग्लादेश में 4 हत्याओं के आरोपी को मुंबई क्राइम ब्रांच ने दबोचा!

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मुंबई. बांग्लादेश में कई हत्याओं के मामले में वांछित आरोपी को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की अपराध खुफिया इकाई (सी. आई. यू.) ने गिरफ्तार किया है. आरोपी जाली दस्तावेजों के मदद से भारत में दाखिल हुआ था और मुंबई में रह रहा था.
मिली जानकारी के अनुसार, इंटेलिजेंस से मिली एक खुफिया जानकारी के आधार पर सीआईयू के कांस्टेबल अविनाश गावडे ने 8 अगस्त 2025 को एक कुख्यात घुसपैठिए के मामला दर्ज किया था. जांच के दौरान सीआईयू की टीम ने दक्षिण मुंबई स्थित नागपाड़ा के कमाठीपुरा, 8वीं लेन क्षेत्र से मोहम्मद अहमद पोटुंदर नामक वांछित आरोपी को हिरासत में लिया.
पहचान बदल कर रह रहा था आरोपी
पोटुंदर की गिरफ्तारी के लिए सीआईयू की टीम गुप्त रूप से अभियान चला रही थी. इसके लिए एक दल को उस स्थान पर तैनात किया गया था, और पहुंचने पर, एक मुखबिर ने काली टी-शर्ट पहने वांछित की शिनाख्त की, जिसके बाद सीआईयू की टीम ने धावा बोलकर पोटुंदर को दबोच लिया. हिरासत में लिए जाने के बाद वह जांच अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास करने लगा. प्रारंभिक पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम कुद्दुस रोहिम शेख बताया. वह इसी नाम से कमाठीपुरा इलाके में रह रहा था.
मिले हिंदुस्तानी
पोटुंदर ने खुद को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले का निवासी बताया. इसे सही साबित करने के लिए उसने फर्जी दस्तावेजों की मदद से हासिल किया गया आधार कार्ड, आधार कार्ड नूतनीकरण की रसीद, पैन कार्ड, वोटिंग कार्ड एवं भारतीय स्टेट बैंक में अकाउंट की पासबुक भी दिखाया. लेकिन इंटेलिजेंस से मिली इनपुट की वजह से पुलिस ने सख्ती दिखाई तो पोटुंदर ने अपने बांग्लादेशी नागरिक होने की बात कबूल कर ली और उसने अपना असली नाम मोहम्मद जमाल मोहम्मद हुसैन पोटुंदर भी स्वीकार कर लिया.
मौत की सजा से भागा था पोटुंदर
पूछताछ में पता चला कि पोटुंदर के खिलाफ बांग्लादेश में कत्ल के 4 मामलों के अलावा एक अन्य आपराधिक मामला भी दर्ज है और उसे कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है. फिलहाल पुलिस ने पोतिंदर के खिलाफ अभियुक्त पर भारतीय न्याय संहिता, विदेशी आदेश, 1948 और विदेशी अधिनियम, 1946 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करके गिरफ्तार किया है. पुलिस ने कहा है कि उसने वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था, जाली दस्तावेजों की मदद से भारतीय पहचान पत्र हासिल किए और बांग्लादेश में कानून प्रवर्तन से बचने के लिए अपनी असली पहचान छुपाई थी.

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