मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा चालक-मालक संगठन ने परिवहन विभाग के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। संयुक्त कृती समिति ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर रिक्शा चालकों पर जबरन पंजीकरण कराने और शुल्क वसूली का विरोध किया है।
समिति का आरोप है कि “धर्मवीर आनंद दिघे महाराष्ट्र ऑटो रिक्शा और मीटर्ड टैक्सी चालक कल्याणकारी मंडल” में रजिस्ट्रेशन के लिए रिक्शा चालकों पर दबाव डाला जा रहा है।
अंधेरी, बोरिवली, कल्याण समेत कई आरटीओ कार्यालयों में बिना पंजीकरण के परमिट नवीनीकरण और अन्य कार्य रोकने की शिकायतें सामने आई हैं।
शुल्क वसूली पर उठे सवाल
संगठन के अनुसार, मंडल में पंजीकरण के लिए 500 रुपए और वार्षिक 300 रुपए शुल्क अनिवार्य किया गया है।
इसे रिक्शा चालकों पर आर्थिक बोझ बताते हुए समिति ने इसे अन्यायपूर्ण करार दिया है।
सरकार के फैसले को बताया एकतरफा
संयुक्त कृती समिति का कहना है कि सरकार ने इस मंडल के गठन से पहले किसी भी प्रमुख रिक्शा संगठनों से चर्चा नहीं की। इतना ही नहीं 20 वर्षों से लंबित मांग को लागू करते समय हितधारकों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया गया है।
मुख्य मांगें क्या हैं?
रिक्शा चालकों पर जबरन पंजीकरण तुरंत बंद किया जाए।
अवैध दबाव बनाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
पंजीकरण और वार्षिक शुल्क पूरी तरह रद्द किए जाएं।
सभी चालकों का मुफ्त पंजीकरण किया जाए।
कल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू हों।
ई-रिक्शा नीति पर भी विरोध
समिति ने सरकार की “दोहरे रवैये” की आलोचना करते हुए कहा कि पारंपरिक ऑटो रिक्शा परमिट पर रोक है, लेकिन ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
उन्होंने मांग की कि इनकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर भी तुरंत रोक लगाई जाए।
संगठन की चेतावनी
अध्यक्ष शशांक राव और महासचिव विलास भालेकर ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्यभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। यह मामला अब रिक्शा चालकों के अधिकारों और सरकार की नीतियों के बीच टकराव का रूप लेता जा रहा।
रिक्शा चालकों के जबरन पंजीकरण का प्रयास : यूनियन ने उठाए सरकार की नीति पर सवाल
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