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महाराष्ट्र में प्रशासनिक सुधारों का नया दौर : रिमोट सेंसिंग और AI के लिए स्वतंत्र विभाग और कंपनियों को मंजूरी

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मुंबई: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में महाराष्ट्र के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। राज्य सरकार ने प्रशासन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने के उद्देश्य से रिमोट सेंसिंग सेंटर के पुनर्गठन, नई जियो-टेक्नोलॉजी कंपनी की स्थापना और एक स्वतंत्र आईटी एवं एआई विभाग के निर्माण पर मुहर लगा दी है। इन फैसलों से न केवल प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी, बल्कि आपदा प्रबंधन और नागरिक सेवाओं में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
एमआरएसएसी (MRSAC) का कंपनी में रूपांतरण
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (MRSAC) की वर्तमान संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए इसे सोसायटी अधिनियम से हटाकर कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक स्वायत्त कंपनी के रूप में पंजीकृत करने का निर्णय लिया है। 1988 में स्थापित यह संस्थान अब आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से सड़क विकास, नगर नियोजन, जलयुक्त शिवार और खनिज प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं प्रदान करेगा। इस नई कंपनी का पंजीकृत कार्यालय नागपुर में होगा और राज्य के मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे।
महाजियोटेक कंपनी के माध्यम से तकनीकी नवाचार
प्रशासनिक कार्यों में भू-स्थानिक (Geospatial) तकनीक का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए ‘महाराष्ट्र जियोटेक्नोलॉजी एप्लीकेशन सेंटर’ यानी ‘महाजियोटेक’ कंपनी स्थापित की जाएगी। इस कंपनी का मुख्यालय मुंबई में होगा और इसके संचालन के लिए सरकार ने शुरुआती चरण में 25 करोड़ रुपये के अनुदान को मंजूरी दी है। यह संस्थान मुख्य रूप से चार विभागों में विभाजित होगा, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करेंगे। महाजियोटेक का मुख्य उद्देश्य जटिल सरकारी समस्याओं को सुलझाने के लिए सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन और डेटा प्रबंधन के नए ढांचे तैयार करना है।
आपदा प्रबंधन के लिए विश्व बैंक के साथ नई पहल
राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए ‘महाराष्ट्र रिस्पॉन्सिव डेवलपमेंट प्रोग्राम’ (MRDP) को लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व बैंक से प्राप्त होने वाली 165 करोड़ रुपये की निधि का उपयोग आपदा प्रभावित नागरिकों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों (MSME) की सहायता के लिए किया जाएगा। इसके तहत बाढ़ या चक्रवात जैसी आपदाओं में फंसे लोगों को गृह ऋण में रियायत और बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। विशेष रूप से कोल्हापुर, सांगली और इचलकरंजी जैसे क्षेत्रों में कृष्णा नदी के बाढ़ संकट को कम करने के लिए प्रभावी योजनाएं ‘मित्रा’ संस्था के माध्यम से लागू की जाएंगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और एआई के लिए स्वतंत्र मंत्रालय
डिजिटल महाराष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य में एक समर्पित ‘इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ विभाग बनाने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही राज्य में एक नया ‘आईटी कैडर’ (IT Cadre) तैयार होगा, जिसमें मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक कुल 427 स्थायी पद शामिल होंगे। इसके अलावा, एक नए आयुक्तालय की भी स्थापना की जाएगी जिसमें 77 पद सृजित किए जाएंगे। इस विभाग का वार्षिक बजट लगभग 133.35 करोड़ रुपये होगा। सरकार का मानना है कि इस स्वतंत्र विभाग के माध्यम से ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा और डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी, जिससे आम नागरिकों तक सरकारी सुविधाएं ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से पहुँच सकेंगी।

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