मुंबई: मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटील ने एक बार फिर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। अंतरवाली सराटी में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार ने आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापस नहीं लिए, तो वे राज्य का सबसे बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे।
सरकार के वादे पर उठाया सवाल
जरांगे पाटील ने कहा कि राज्य सरकार ने मराठा आंदोलन से जुड़े सभी मुकदमे वापस लेने का वचन दिया था, लेकिन अब तक वह पूरा नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी मामले वापस नहीं होते, वे चुप नहीं बैठेंगे। मराठा आरक्षण के लिए राज्यभर में हुए विभिन्न आंदोलनों में करीब डेढ़ हजार से अधिक आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे।
मामलों की मौजूदा स्थिति
आंदोलन के पहले चरण में अगस्त 2018 तक कुल 548 मुकदमे दर्ज हुए थे, जबकि दूसरे चरण में 961 मामले सामने आए। पहले चरण के 286 और दूसरे चरण के 542 मामले वापस लिए जा चुके हैं। हालांकि, पहले चरण के 17 और दूसरे चरण के 64 गंभीर मामले — जिनमें सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया — वापस नहीं लिए जा सकते। दूसरे चरण के 62 मामलों पर अभी विभागीय समिति का निर्णय बाकी है।
मुख्यमंत्री का जवाब
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि गृह विभाग की कोई बैठक नहीं हुई और किसी भी मामले को वापस लेने से इनकार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जिन मामलों में सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है, उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता।
उपसमिति और विद्यार्थियों का मुद्दा
जरांगे पाटील ने मराठा समाज के लिए गठित उपसमिति पर भी निशाना साधा और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील की आलोचना करते हुए कहा कि उपसमिति केवल दिखावे की बैठकें न करे, बल्कि ईबीसी, सारथी और स्वास्थ्य विभाग में मराठा विद्यार्थियों को न्याय दिलाने पर ध्यान दे।
मनोज जरांगे का अल्टीमेटम: मुकदमा वापस लो, वरना होगा महाआंदोलन!
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