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कांदा उत्पादक किसान बर्बाद : चार महीने में 400 करोड़ का नुकसान

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मुंबई: कांदे को मात्र एक रुपये प्रति किलो का भाव मिलने और उत्पादन लागत 18 रुपये होने से प्याज किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं। पिछले चार महीनों में सोलापुर कृषि उपज बाजार समिति में किसानों के 400 करोड़ रुपए डूबने का अनुमान है।
नीचांकी दरों का संकट
शुक्रवार को सोलापुर बाजार समिति में कांदा मात्र 100 रुपए प्रति क्विंटल (एक रुपये किलो) पर बिका। यह चालू वर्ष की न्यूनतम दर है, जिससे उत्पादक शेतकरी देशोधड़ी हो गए हैं। केंद्र सरकार की निर्यातबंदी और उपभोक्ता-हितैषी नीतियों को इसका बड़ा कारण माना जा रहा है।
बढ़ती लागत और घटता मुनाफा
खरीप सीजन में अतिवृष्टि से उत्पादन घटा तो रबी में हालात और बिगड़ गए। नवंबर से लगातार दरें उत्पादन लागत से कम चल रही हैं। बीज, मजदूरी, खाद और दवाइयों के बढ़ते दामों के कारण कांदे की उत्पादन लागत 18 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि बाजार में औसत भाव मात्र 6 रुपए मिल रहा है. इस तरह शेतकऱियों को 10 से 12 रुपए प्रति किलो का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
आवक और दरों का हाल
जनवरी में 12.50 लाख क्विंटल कांदा 850 रुपए प्रति क्विंटल, फरवरी में 9.72 लाख क्विंटल 800 रुपए, मार्च में 8.84 लाख क्विंटल 650 रुपए और अप्रैल में 5.69 लाख क्विंटल मात्र 600 रुपए प्रति क्विंटल पर बिका. किसानों को सरकार से अनुदान की उम्मीद थी, लेकिन अब तक कोई ठोस घोषणा न होने से उनमें गहरी नाराजगी है.

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