मुंबई: उद्योगपति अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) से जुड़े कथित बैंक घोटाले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में अनिच्छा और लापरवाही नजर आ रही है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों एजेंसियों को निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ और समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने का आदेश दिया।
इस मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी ईएएस शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एडीएजी समूह की कंपनियों ने 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज घोटाला किया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ‘सीबीआई’ और ‘ईडी’ का पक्ष रखा। कोर्ट ने कहा कि यदि सरकारी एजेंसियों से जांच में सहयोग नहीं मिल रहा है, तो इसे स्पष्ट रूप से सामने लाया जाए।
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन
कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुसार इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। इस टीम में ईडी के वरिष्ठ अधिकारी और बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं। अब तक जांच एजेंसियों ने करीब 15 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। सेबी (एसईबीआई) रिपोर्ट का हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सेबी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस घोटाले में धन को दूसरी जगह डायवर्ट करने की साजिश रची गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीआई ने अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है, हालांकि इस पर सरकार की ओर से गिरफ्तारी होने की बात कही गई।
जांच की धीमी रफ्तार स्वीकार्य नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह यह निर्देश नहीं दे सकता कि किसे गिरफ्तार किया जाए, लेकिन जांच एजेंसियों की धीमी गति और उदासीनता स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने एजेंसियों से पूछा कि अब तक समयबद्ध तरीके से क्या प्रगति हुई है और उसे सार्वजनिक किया जाए।
73 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है घोटाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच रिपोर्ट के आधार पर चौंकाने वाली बात सामने रखी। रिपोर्ट के मुताबिक, 3000 करोड़ रुपए से अधिक के बकाया कर्ज का निपटारा महज 26 करोड़ रुपए में किया गया। कोर्ट ने अनुमान जताया कि इस पूरे घोटाले की रकम करीब 73 हजार करोड़ रुपए तक हो सकती है।
कई मामलों की जांच जारी
फिलहाल सीबीआई सात और ईडी आठ अलग-अलग मामलों की जांच कर रही हैं। कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े घोटाले में पारदर्शी और तेज जांच बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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