मुंबई. एलओसी पर पाकिस्तान के साथ चल रही जंग में मुंबईकर अग्निवीर मुरली नाईक गुरुवार को शाहिद हो गए. बताया जा रहा है कि गुरुवार शुक्रवार की जम्मू-कश्मीर के ऊरी सेक्टर में पाकिस्तान के साथ जारी जंग के दौरान मुरली दुश्मन के सेना के खिलाफ बहादुरी से लड़े. लेकिन दुर्भाग्य से इसी दौरान वह घायल हो गए थे. शुक्रवार को सुबह में 3.30 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया.
22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम ने पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने 26 हिंदू पर्यटकों की गोली मारकर नृशंसता पूर्वक हत्या कर दी थी. बीते बुधवार को भारत ने पीओके सहित पाकिस्तान में कुल 9 आतंकी अड्डों पर हमला बोलकर 100 से ज्यादा आतंकियों को ढेर कर दिया था. भारतीय सेना की स्ट्राइक में ऊरी और संसद भवन हमले सहित कई आतंकी हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद के परिवार के 14 लोग भी मारे गए थे. पाकिस्तान इससे बौखलाया गया है. पाकिस्तानी सेना और सरकार ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा, श्रीनगर, जम्मू और पठानकोट सहित पंजाब, राजस्थान और गुजरात के सरहदी क्षेत्र में स्थित में भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों एवं
रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने की नाकाम कोशिशें लगातार कर रही है. ऊरी में ऐसी ही गोलीबारी के दौरान मुरली नाईक शहीद हो गए.

इकलौते पुत्र थे मुरली
23 वर्षीय मुरली नाईक के माता पिता मूल रूप से आंध्र प्रदेश के निवासी हैं. लेकिन वे करीब 40 साल पहले मुंबई आ गए थे. मुरली का जन्म मुंबई में ही हुआ था. वह माता पिता के साथ घाटकोपर के कामराज नगर क्षेत्र में रहते थे. बताया जा रहा है कि मुरली अपने माता पिता की इकलौती संतान थे. अग्निवीर योजना के अंतर्गत दिसंबर 2022 में वह सेना में भर्ती हुए थे. महाराष्ट्र के नासिक जिला अंतर्गत देवलाली कैंप में 9 महीने की सख्त ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें जम्मू-कश्मीर के ऊरी सेक्टर में स्थित सैन्य प्रतिष्ठान में तैनात किया गया था.

