सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूकता को बनाए रखने वाली पहल
मुंबई. राज्य भर में बीते 3 महीनों में पहले अति वृष्टि और फिर बेमौसम बारिश के कारण आई बाढ़ तथा प्राकृतिक आपदाओं की वजह से हज़ारों किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. चावल, सब्ज़ियां, बाग़, गन्ना, सोयाबीन, कपास आदि सहित विभिन्न फसलें काफ़ी हद तक बर्बाद हो गईं. कुछ जगहों पर न केवल खेतों में लगी फ़सलें, बल्कि पशुओं का चारा, घरेलू सामान और अनाज भी बह गए. लेकिन कई किसान अभी भी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, राज्य सरकार अभी भी सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया में है. लेकिन इस कठिन समय में महाराष्ट्र विधानसभा सचिवालय में विधायकों के निजी सहायकों द्वारा किसानों तक पहुंचने और उनकी मदद करने की एक अनुकरणीय पहल की गई है. न केवल सरकारी नौकरी करते हुए, बल्कि अपने सामाजिक दायित्व को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने अपने स्तर पर मुख्यमंत्री सहायता कोष हेतु 3,03,030/- (तीन लाख तीन हज़ार तीस) रुपए की राशि एकत्रित की. यह राशि “फूल नहीं, बल्कि फूल की पंखुड़ी” की भावना के साथ मंत्रालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई. उपस्थित वातावरण भावनात्मक उत्साह, सामाजिक सरोकार की भावना और एकता के संदेश से परिपूर्ण था. विधायक जनता के प्रतिनिधि होते हैं. लेकिन उन विधायकों के साथ खड़े होकर विभिन्न कार्यों, संवाद और समन्वय का दायित्व संभालने वाले उनके निजी सहायक भी समाज में समान रूप से महत्वपूर्ण तत्व हैं. इस दायित्व के प्रति यह जागरूकता इस पहल में स्पष्ट रूप से दिखाई दी. यह पहल केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में लोगों के साथ खड़े होने की मानसिकता और संवेदनशीलता का संदेश बन गई है. इस पहल का विचार सबसे पहले बोईसर विधानसभा क्षेत्र से शिवसेना विधायक विलास तारे के निजी सहायक श्री एस. मुलानी ने रखा था. उन्होंने सभी निजी सहायकों से एकजुट होकर किसानों की मदद में योगदान देने की अपील की. इस पर सभी स्वयं-सहायकों ने सहजता से प्रतिक्रिया देते हुए एकजुटता दिखाई और संवेदनशीलता के साथ इस पहल में भाग लिया तथा स्वेच्छा से योगदान दिया. इस दौरान, उपस्थित स्वयं-सहायकों ने कहा, “किसानों ने अपने पसीने से देश की खाद्य सुरक्षा को बनाए रखा है. संकट की इस घड़ी में कुछ हद तक मदद का हाथ बढ़ाना हमारी ज़िम्मेदारी है.”
चेक स्वीकार करते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं-सहायकों की इस संवेदनशीलता की तहे दिल से सराहना की और कहा, “यह एक बड़ी प्रेरणा है कि आज सरकारी व्यवस्था में कार्यरत युवा सामाजिक प्रतिबद्धता को निभाते हुए स्वयं आगे आ रहे हैं. यह पहल समाज के अन्य वर्गों के लिए भी एक आदर्श बनेगी.” मुख्यमंत्री ने सभी स्वयं-सहायकों को बधाई दी और भविष्य में भी ऐसे सामाजिक कार्यों में अपनी भागीदारी बढ़ाने की अपील की. स्वयं-सहायकों ने कहा कि यह पहल केवल आज तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में भी समाज सेवा और आपदा प्रबंधन में सक्रिय रूप से भाग लेने का उनका संकल्प है. संकट के समय में एकजुट होकर समाज के लिए कुछ करने की भावना राज्य के अन्य युवाओं को प्रेरित कर रही है.
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