महाराष्ट्र ने ‘मांगने वालों को सौर कृषी पंप’ योजना में बनाया विश्व रिकॉर्ड
मुंबई. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को घोषणा की है कि महाराष्ट्र ने सौर ऊर्जा के उपयोग में देश में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने के कारण अब राज्य अन्य उपयोगों के लिए बिजली के दरों में प्रतिवर्ष 3% की कटौती करेगा, जिससे उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल सकेगी. राज्य के ‘मांगने वालों को सौर कृषी पंप’ योजना के तहत, महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी (महावितरण) ने केवल एक महीने में 45,911 सौर कृषि पंप लगा कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया. इस ऐतिहासिक उपलब्धि के प्रमाणपत्र प्रदान समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सस्ती बिजली की संकल्पना के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि सौर ऊर्जा की बढ़ती उपलब्धता से राज्य में हर साल बिजली दरों में 3% की कमी की जा सकेगी.
महाराष्ट्र ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है. ‘मांगने वालों को सौर कृषीपंप’ योजना के तहत महावितरण ने एक ही महीने में 45,911 सौर कृषि पंप स्थापित करने का अभूतपूर्व विश्व कीर्तिमान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है. इस ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रमाण पत्र वितरण समारोह छत्रपती संभाजीनगर के शेंद्रा एमआयडीसी स्थित ऑरिक सिटी मैदान पर आयोजित किया गया. इस मौके पर मुख्यमंत्री फडणवीस मुख्य रूप से उपस्थित थे। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के पंच कार्ल सॅबेले ने आधिकारिक तौर पर इस विश्व रिकॉर्ड की घोषणा की और प्रमाण पत्र प्रदान किया. कार्ल सॅबेले ने बताया: “रिकॉर्ड के लिए 35,000 पंप स्थापित करना आवश्यक था, लेकिन महाराष्ट्र ने 45,911 पंप स्थापित किए, जो एक विश्व रिकॉर्ड है. प्रत्येक पंप की स्थापना से लेकर कार्यान्वयन तक के सभी चरणों की गहनता से जांच के बाद इस रिकॉर्ड को मान्यता दी गई है.” समारोह में अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण एवं अपारंपरिक ऊर्जा मंत्री अतुल सावे, राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने डिजिटल रूप से राज्य के सौर कृषि पंपों का लोकार्पण किया और लाभार्थियों से संवाद किया.
किसानों को मिलेगी दिन में बिजली, उत्पादन क्षमता में वृद्धि
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि सूखे की समस्या और रात में सिंचाई की मजबूरी को देखते हुए, सरकार ने किसानों के फीडर को सौर ऊर्जा पर लाने की नीति तय की. उन्होंने कहा कि यह योजना इतनी सफल रही कि केंद्र सरकार ने इसे अन्य राज्यों को भी अपनाने के लिए पत्र लिखा, जिसके बाद ‘कुसुम’ योजना का जन्म हुआ. आज महाराष्ट्र में देश के सर्वाधिक 7 लाख सौर पंप लगाए जा चुके हैं. सौर पंप स्थापित करने की क्षमता को बढ़ाया गया है, जिससे किसानों का प्रतीक्षा काल कम हुआ है. इसी के साथ मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अगले एक साल में सौर कृषि पंपों की संख्या 10 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य दिया.
16,000 मेगावॉट स्वच्छ बिजली और रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से कृषि के लिए स्वतंत्र 16,000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा. यह बिजली पूरी तरह से प्रदूषण रहित होगी और इसकी उत्पादन लागत कम होगी. उत्पादन लागत कम होने से अन्य क्षेत्रों के लिए बिजली सस्ती और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होगी, जिससे प्रतिवर्ष 3% बिजली दर कम करने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा. इस योजना ने सौर ऊर्जा उपकरण निर्माताओं, वेंडर्स, तकनीशियनों और देखभाल करने वाले कर्मचारियों सहित 1 लाख लोगों को रोजगार भी दिया है.
मराठवाड़ा की भूमिका और भविष्य के प्रयास
मुख्यमंत्री ने मराठवाड़ा क्षेत्र की सराहना की, जिसने इस योजना के कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाई है, जहां छत्रपती संभाजीनगर जिले में 14,000 पंप लगाए गए हैं. उन्होंने ‘नानासाहेब देशमुख कृषि संजीवनी योजना’ और नदी जोड़ परियोजनाओं के माध्यम से मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र को सूखा मुक्त कर खेती को समृद्ध और टिकाऊ बनाने का संकल्प दोहराया.

