मुंबई: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए वर्ष 2026-27 के बजट पर महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहाँ सत्ताधारी महायुति सरकार ने इसे ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ता कदम बताया है, वहीं विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) ने इसे राज्य के साथ अन्याय करार दिया है।
यह बजट महाराष्ट्र के आधुनिक बुनियादी ढांचे (Modern Infrastructure) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश करता है। जहाँ हाई-स्पीड रेल मुंबई जैसे महानगरों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी, वहीं सौर ऊर्जा और एग्री-बिजनेस प्रोजेक्ट्स विदर्भ और मराठवाड़ा के किसानों को आत्मनिर्भर बनाएंगे।
सत्तापक्ष: “महाराष्ट्र के विकास को मिलेगी नई गति”
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस:
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बजट का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्रीय करों में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी रुपए 98,306 करोड़ होगी। इसके अतिरिक्त विभिन्न परियोजनाओं के लिए रु. 12,355 करोड़ आवंटित किए गए हैं। कुल मिलाकर महाराष्ट्र को करीब 1 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। उन्होंने मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर को जीडीपी के लिए गेम-चेंजर बताया।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे:
शिंदे ने कहा कि यह बजट मुंबई और महाराष्ट्र को अधिक शक्ति देने वाला है। उन्होंने ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी’ और ‘शी-मार्ट’ (लखपती दीदी के लिए) जैसी घोषणाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए रु. 12.2 लाख करोड़ का बुनियादी ढांचा कोष शहरी विकास की तस्वीर बदल देगा।
केंद्रीय बजट का स्वागत
बजट युवा-केंद्रित, किसान-हितैषी और समावेशी विकास के लिए एक ठोस रोडमैप है, जबकि देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई. स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री, एग्रीकल्चर और रोजगार पैदा करने के सभी सेक्टर में यूनियन बजट में किए गए ठोस प्रावधान भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएंगे. बजट में महाराष्ट्र के लिए घोषित मेट्रो प्रोजेक्ट्स, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल, साथ ही मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा से राज्य के विकास को नई गति मिलेगी. शहरी विकास, नदी पुनर्जीवन, एग्री-बिजनेस नेटवर्क और ग्रामीण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के लिए मिले फंड से महाराष्ट्र का संतुलित विकास मजबूत होगा। हेल्थ सेक्टर में बायोफार्मा पॉलिसी, कैंसर और डायबिटीज की दवाएं सस्ती करने का फैसला, साथ ही सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान भारत की नॉलेज-बेस्ड इकोनॉमी के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह बजट देश की पूरी तरक्की के लिए अहम होगा।
– सुनेत्रा अजीत पवार, उप मुख्यमंत्री
अन्य प्रमुख प्रतिक्रियाएं:
- नीलम गोऱ्हे (उपसभापति, विधान परिषद): उन्होंने हर जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास और कैंसर-मधुमेह की दवाओं के दाम कम करने के फैसले को ‘महिला सशक्तिकरण का नया इतिहास’ बताया।
- रविंद्र चव्हाण (भाजपा प्रदेशाध्यक्ष): इसे आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप बताते हुए उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए ₹40,000 करोड़ के प्रावधान को महत्वपूर्ण बताया।
- मंगल प्रभात लोढा: उन्होंने ‘बायो फार्मा मिशन’ और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों की प्रशंसा की।
विपक्ष: “आंकड़ों की जुमलेबाजी और महाराष्ट्र का अपमान”
हर्षवर्धन सपकाळ (प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस):
सपकाळ ने बजट को दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल बड़े आंकड़े पेश किए हैं, जबकि वास्तविकता में बेरोजगारी 50% से ऊपर पहुंच गई है।
वर्षा गायकवाड (सांसद, कांग्रेस):
सांसद गायकवाड ने कड़े शब्दों में कहा, “केंद्रीय बजट में महाराष्ट्र को ‘जीरो’ मिला है। यह महाराष्ट्र विरोधी सरकार है। देश को सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले राज्य के हाथ में सिर्फ झुनझुना थमाया गया है।”
विजय वडेट्टीवार (नेता प्रतिपक्ष):
वडेट्टीवार ने कहा कि यह बजट महाराष्ट्र के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज या न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कोई ठोस प्रावधान नहीं है। यह बजट केवल चुनिंदा उद्योगपतियों के फायदे के लिए है।
संजय राउत (सांसद, शिवसेना-UBT):
राउत ने तंज कसते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों की तरह यह बजट भी अमीरों के लिए है। गरीबों के नाम पर केवल खोखली घोषणाएं की गई हैं।
महाराष्ट्र के लिए बजट की बड़ी बातें:
| परियोजना / क्षेत्र | आवंटित राशि (करोड़ में) |
| मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर | रुपए 6103 |
| मुंबई मेट्रो | रु. 1702 |
| कृषि और ग्रामीण परिवर्तन | रु. 646.24 |
| पुणे मेट्रो | रु. 517.74 |
| महाराष्ट्र मेडिकल शिक्षा कार्यक्रम | रु. 385.78 |
निष्कर्ष: जहाँ सरकार इस बजट को बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास का महाकुंभ बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बढ़ती आर्थिक विषमता और बेरोजगारी को नजरअंदाज करने वाला दस्तावेज करार दे रहा है।
बजट 2026-27: महाराष्ट्र के लिए रेल और कृषि क्षेत्र का विशेष विश्लेषण
केंद्र सरकार ने इस बजट के माध्यम से महाराष्ट्र को देश के ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। कृषि में तकनीक का समावेश और रेल कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव इस बजट के केंद्र बिंदु हैं।
1. रेल और बुनियादी ढांचा: कनेक्टिविटी का नया युग
महाराष्ट्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों को जोड़ने के लिए रेल नेटवर्क पर सबसे अधिक ध्यान दिया गया है।
- हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए रु. 6,103 करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया गया है। साथ ही, मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद के बीच नए हाई-स्पीड कॉरिडोर की घोषणा की गई है, जिससे यात्रा के समय में 50% तक की कमी आने की उम्मीद है।
- मेट्रो नेटवर्क: मुंबई मेट्रो (रु. 1,702 करोड़) और पुणे मेट्रो (रु. 517.74 करोड़) के लिए विशेष फंड आवंटित किया गया है, जो शहरी यातायात को सुगम बनाएगा।
- टीबीएम (TBM) मशीन कर माफी: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘पाताळ लोक’ (70 किमी लंबी भूमिगत सड़कें) के लिए टनल बोरिंग मशीन पर आयात शुल्क और टैक्स में राहत दी गई है, जिससे इस प्रोजेक्ट की लागत कम होगी।
2. कृषि और ग्रामीण विकास: तकनीक से समृद्धि
महाराष्ट्र जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए बजट में सिंचाई और डिजिटल खेती पर जोर दिया गया है।
- डिजिटल खेती और AI: किसानों के लिए बहुभाषी AI तकनीक विकसित की जा रही है, जो फसल रोगों और मौसम की सटीक भविष्यवाणी करेगी।
- सिंचाई परियोजनाएं: ‘उपसा सिंचाई योजनाओं’ के सौर ऊर्जाकरण के लिए रु. 207.10 करोड़ दिए गए हैं, जिससे किसानों का बिजली बिल कम होगा।
- नारद-काजू प्रोत्साहन: कोंकण क्षेत्र के किसानों के लिए नारियल और काजू की खेती को बढ़ावा देने के लिए नई तकनीक और वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
- एग्री-बिजनेस: महाराष्ट्र एग्रीबिज़नेस प्रोजेक्ट के लिए रु. 167.28 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने में मदद करेंगे।
3. महिला सशक्तिकरण और सामाजिक क्षेत्र
- लखपती दीदी और ‘शी-मार्ट’ (SHE-Mart): महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) को उद्यमी बनाने के लिए ‘शी-मार्ट’ की स्थापना की जाएगी।
- शिक्षा: राज्य के हर जिले में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली लड़कियों के लिए नए हॉस्टल बनाए जाएंगे।
प्रमुख आवंटन एक नजर में (तालिका)
| क्षेत्र | परियोजना | आवंटन (करोड़ ₹) |
| परिवहन | मुंबई-पुणे हाई-स्पीड रेल | (प्रारंभिक कार्य शुरू) |
| शहरी विकास | मुंबई मेट्रो प्रोजेक्ट | रु. 1,702 |
| कृषि | कृषि एवं ग्रामीण परिवर्तन (SMART) | रु. 646.24 |
| सड़क | महाराष्ट्र ग्रामीण सड़क परियोजना | रु. 378.38 |
| स्वास्थ्य | मेडिकल शिक्षा एवं टर्शरी केयर | रु. 385.78 |
निश्चित रूप से, बजट 2026-27 के महाराष्ट्र के शहरी विकास (Urban Development) और MSME क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण यहाँ दिया गया है:
महाराष्ट्र बजट विश्लेषण: शहरी विकास और MSME क्षेत्र
महाराष्ट्र, जो भारत की औद्योगिक राजधानी और सबसे अधिक शहरीकृत राज्यों में से एक है, के लिए इस बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।
1. शहरी विकास: ‘ग्रोथ हब’ और स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर
बजट में बड़े महानगरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।
- सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER): सरकार ने टियर-2 और टियर-3 शहरों (जैसे पुणे, नासिक, नागपुर) के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अगले 5 वर्षों के लिए प्रति CER ₹5,000 करोड़ का आवंटन किया गया है।
- नगरपालिका बॉन्ड (Municipal Bonds): मुंबई जैसी बड़ी नगरपालिकाओं को मजबूत करने के लिए, ₹1,000 करोड़ से अधिक के बॉन्ड जारी करने पर ₹100 करोड़ का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा। इससे बीएमसी (BMC) जैसे निकायों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए धन जुटाने में आसानी होगी।
- शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड: 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए रु. 12.2 लाख करोड़ का विशाल फंड रखा गया है, जिसका एक बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के उभरते शहरी केंद्रों को आधुनिक बनाने में खर्च होगा।
- क्रिएटिव इकोनॉमी: मुंबई को ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी’ (IICT) के माध्यम से एक वैश्विक हब बनाया जाएगा। यह संस्थान देश भर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब्स’ स्थापित करने में नेतृत्व करेगा।
2. MSME क्षेत्र: लघु उद्योगों को ‘चैंपियन’ बनाने की तैयारी
महाराष्ट्र में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है। बजट 2026 में इनके लिए ‘थ्री-प्रोंग्ड’ (तीन-स्तरीय) दृष्टिकोण अपनाया गया है:
- SME ग्रोथ फंड: उभरते छोटे उद्योगों को पूंजी (Equity) प्रदान करने के लिए रु. 10,000 करोड़ का समर्पित फंड बनाया गया है। इससे महाराष्ट्र की छोटी कंपनियों को विस्तार करने में मदद मिलेगी।
- लिक्विडिटी (नकदी) सपोर्ट: TReDS प्लेटफॉर्म को मजबूत किया गया है ताकि छोटे व्यापारियों को उनके बकाया बिलों का भुगतान समय पर और कम ब्याज पर मिल सके।
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: सेमीकंडक्टर मिशन के लिए रु. 40,000 करोड़ का प्रावधान महाराष्ट्र के पुणे और तलोजा जैसे इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर्स के लिए नई राहें खोलेगा।
- कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग: लॉजिस्टिक्स को सस्ता बनाने के लिए कंटेनर निर्माण हेतु रु. 10,000 करोड़ की योजना शुरू की गई है, जिसका लाभ जेएनपीटी (JNPT) बंदरगाह के आसपास के उद्योगों को मिलेगा।
महत्वपूर्ण आंकड़े और प्रभाव (तालिका)
| पहल | विवरण | महाराष्ट्र पर प्रभाव |
| City Economic Regions | रु. 5,000 Cr प्रति शहर (5 साल) | पुणे और नागपुर जैसे शहरों का कायाकल्प |
| SME Growth Fund | रु. 10,000 Cr का कुल कोष | छोटे स्टार्टअप्स को विस्तार के लिए पूंजी |
| Municipal Bonds | रु. 100 Cr प्रोत्साहन | मुंबई और ठाणे नगर निगमों की वित्तीय शक्ति में वृद्धि |
| IICT मुंबई | AVGC सेक्टर के लिए हब | युवाओं के लिए डिजिटल क्रिएटिविटी में रोजगार |
यह बजट महाराष्ट्र के शहरों को न केवल ‘रहने योग्य’ बल्कि ‘आर्थिक रूप से उत्पादक’ बनाने का लक्ष्य रखता है। जहाँ एक ओर टियर-2 शहरों को नए फंड से मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर एमएसएमई क्षेत्र को नकदी और तकनीक के माध्यम से वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा रहा है।
