4 दिनों में 75 स्कूलों को दिया अल्पसंख्यक दर्जा
मुंबई. राकांपा प्रमुख और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद राज्य में शोक की लहर थी लेकिन इसी बीच मंत्रालय में उनके अधीन काम करने वाले अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारियों की हरकत से सियासी पारा चढ़ गया है। आरोप है कि 28 जनवरी को अजीत पवार के दुखद निधन वाले दिन और उसके बाद के चार दिनों में विभाग ने जमकर फाइलें पास कीं और 75 शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जे का प्रमाण पत्र बांट दिया। इस पूरे प्रकरण ने महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मचा दी है। विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है, जबकि सरकार मामले की जांच का दावा कर रही है। अब देखना यह है कि इस जांच में क्या कुछ और खुलकर सामने आता है।
राज्य सरकार ने 28, 29, 30 जनवरी और 2 फरवरी को कुल 75 शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया। हैरानी की बात यह है कि 28 जनवरी की सुबह बारामती में हुए प्लेन क्रैश हादसे में अजीत पवार के असामयिक निधन की वजह से सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी सरकारी कार्यालय बंद करने के निर्देश जारी कर दिए थे। इसके बाद भी 28 जनवरी को दोपहर 3.09 बजे पहली फाइल पास की गई. इतना ही नहीं कुछ प्रमाणपत्र कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद शाम 6.45 और 6.58 बजे भी जारी किए गए।
किन संस्थानों को मिला फायदा?
इन 75 संस्थानों में पोद्दार इंटरनेशनल स्कूल की 25 शाखाओं को अकेले 29 जनवरी को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। इसी तरह सेंट झेवियर्स संस्था की 5 स्कूलों, स्वामी शांति प्रकाश और देवप्रकाश संस्था की 4 स्कूलों को भी यह दर्जा दिया गया। इसके अलावा श्री माता कन्यका सेवा संस्था और सेवादास महाराज शिक्षण प्रसारक मंडल, यवतमाल सहित कई अन्य संस्थाओं को भी प्रमाणपत्र जारी किए गए।
छह महीने से अटकी थीं फाइलें
बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकतर शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा देने की प्रक्रिया अगस्त 2025 से ही लंबित थी। सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे, मंत्री दत्तात्रय भरणे और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कुछ संस्थानों के प्रमाणपत्रों को रोक रखा था। अजित पवार के निधन के बाद इन फाइलों को अचानक मंजूरी दे दी गई।
क्या है अल्पसंख्यक दर्जे का लाभ?
अल्पसंख्यक दर्जा मिलने से शैक्षणिक संस्थानों को कई तरह की विशेष सहूलियतें और अधिकार मिल जाते हैं। इन स्कूलों पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू नहीं होता, जिससे 25% गरीब बच्चों को मुफ्त प्रवेश देने की बाध्यता समाप्त हो जाती है। इन संस्थानों को शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति में विशेष छूट मिलती है और टीईटी परीक्षा अनिवार्य नहीं होती। ये संस्थान सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे में भी नहीं आते। इन्हें करोड़ों रुपए का दान और अनुदान लेने की छूट होती है और विद्यार्थियों की संख्या का कोई बंधन नहीं होता।
विपक्ष ने साधा निशाना
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा, “अजीत का प्रशासन पर मजबूत नियंत्रण था। उनके निधन के कुछ घंटों के भीतर ही ऐसा कृत्य होना बेहद शर्मनाक है। यह ‘चिता की आग पर रोटी सेंकने’ जैसा है। यह किसके इशारे पर हुआ? इसकी पूरी जिम्मेदारी देवेंद्र फडणवीस को लेनी चाहिए और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”
सीएम फडणवीस का एक्शन
मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने तुरंत संज्ञान लिया और वितरित किए गए सभी 75 अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाण पत्रों पर रोक लगाने का आदेश दिया। उन्होंने एक वरिष्ठ अधिकारी से इस पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अल्पसंख्यक आयोग ने उठाए सवाल
राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य वसीम बुरहान ने उपमुख्यमंत्री एवं अल्पसंख्यक मंत्री सुनेत्रा पवार को पत्र लिखकर मांग की है कि इस पूरी घटना की जांच की जाए और जांच पूरी होने तक इन संस्थानों का अल्पसंख्यक दर्जा स्थगित कर दिया जाए।
सुनेत्रा ने दिए जांच के आदेश
इस बीच, उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा अजीत पवार ने सोमवार को विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को गलत ढंग से जारी किए गए अल्पसंख्यक दर्जे वाले प्रमाण पत्रों के वितरण की विस्तृत जांच करने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कारवाई करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत दादा ने जो रास्ता दिखाया है, उसी के अनुसार विभाग का कामकाज होना चाहिए।

विभाग को दिए निम्न निर्देश:
अल्पसंख्यक समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
मौलाना आजाद महामंडळाच्या शैक्षणिक कर्जाची मर्यादा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने के निर्देश।
‘डॉ. जाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ के तहत अनुदान 2 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने की घोषणा।
अल्पसंख्यक छात्रों के छात्रावास जल्द पूरे करने के आदेश।
वक्फ बोर्ड, वक्फ ट्रिब्यूनल और हज कमेटी में लंबे समय से खाली पड़े पदों को जल्द भरने के निर्देश।
छत्रपति संभाजीनगर में नवस्थापित अल्पसंख्यक आयुक्तालय को मजबूत करने के लिए अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराने के आदेश।
बेरोजगार अल्पसंख्यक युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर कौशल विकास कार्यक्रम चलाने पर जोर।
खारघर, नवी मुंबई में प्रस्तावित ‘श्री गुरु तेग बहादुर साहिबजी 350वां शहीदी समागम’ कार्यक्रम की प्रशासनिक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश।
