‘ ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2026’ सम्मेलन का उद्घाटन
मुंबई : वैश्वीकरण के नए चरण में “विश्वसनीय वैश्वीकरण” की अवधारणा उभर रही है और इस परिप्रेक्ष्य में महाराष्ट्र का रणनीतिक महत्व और अधिक स्पष्ट हो रहा है। महाराष्ट्र भारत के जीडीपी में लगभग 14 से 15 प्रतिशत का योगदान देता है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में राज्य अग्रणी है। देश के औद्योगिक उत्पादन में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी तथा पश्चिमी बंदरगाहों से 60 प्रतिशत से अधिक कंटेनर यातायात महाराष्ट्र से होता है। आने वाले समय में मुंबई वैश्विक पूंजी का प्रवेशद्वार बनेगी और वैश्विक आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बहुध्रुवीय विश्व में विश्वसनीय साझेदारी ही सफलता की कुंजी होगी, ऐसा विश्वास मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने व्यक्त किया।
विदेश मंत्रालय, फ्यूचर इकोनॉमिक कोऑपरेशन काउंसिल और महाराष्ट्र शासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2026’ सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री फडणवीस और विदेश मंत्री S. Jaishankar की प्रमुख उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, राजनयिक समुदाय और वैश्विक साझेदार बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री का संदेश: दुनिया के लिए आशा की किरण भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच यह सम्मेलन गहन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संवाद को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। यह मंच रणनीतिक नवाचार और आर्थिक अवसरों के संगम पर विभिन्न देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों, उद्योगपतियों और निवेशकों को एक साथ लाता है। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के दौर में स्थिर नेतृत्व की तलाश कर रही दुनिया के लिए भारत आशा की किरण बनकर उभरा है। उच्च आर्थिक वृद्धि और नियंत्रित महंगाई के संतुलन के साथ भारत वैश्विक चुनौतियों के व्यावहारिक और विस्तार योग्य समाधान प्रस्तुत कर रहा है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से भारत ने पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाया है। आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) उसकी विकास यात्रा के केंद्र में है। देश की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म (नॉन-फॉसिल) स्रोतों से आता है। भारत अब ग्लोबल साउथ की एक विश्वसनीय और आत्मविश्वासी आवाज बन चुका है।
पारदर्शिता, विनियमन और व्यापकता में अग्रणी मुंबई
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आर्थिक संप्रभुता का अर्थ आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि विविधीकृत व्यापार, विनिर्माण क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी क्षमता का संतुलित समन्वय है। महाराष्ट्र इसी रणनीतिक स्वायत्तता और सहयोगात्मक सहभागिता के मॉडल को अपना रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की वैश्विक व्यवस्था कॉरिडोर-आधारित होगी और महाराष्ट्र इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुंबई पारदर्शिता, नियमन और समावेशिता में अग्रणी रहेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा गवर्नेंस, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला और कुशल मानव संसाधन भविष्य की शक्ति निर्धारित करेंगे। महाराष्ट्र एआई पार्क, डेटा सेंटर क्लस्टर और कौशल विश्वविद्यालय स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक विषय बन चुका है। राज्य ग्रीन हाइड्रोजन, सौर एवं पवन ऊर्जा, हरित गतिशीलता और सतत शहरी अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की संरचनात्मक प्रगति
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यापार में व्यापक पुनर्संरचना हो रही है। सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, दुर्लभ खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्र अब राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं। पूंजी प्रवाह केवल लाभ पर नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संरेखण पर आधारित हो रहे हैं। यह आर्थिक राज्य-व्यवस्था का युग है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जी-20 अध्यक्षता, इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) की अवधारणा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विस्तार और ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कूटनीति और अर्थव्यवस्था अब एक-दूसरे से अविभाज्य हो चुके हैं।
‘डी-रिस्किंग’ और विविधीकरण आवश्यक – एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि विश्व वर्तमान में अत्यंत अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रहा है। रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में एक साथ परिवर्तन हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में ‘डी-रिस्किंग’ और विविधीकरण का मार्ग अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य उद्योग, सेवा, कृषि, प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और नवाचार में समानांतर प्रगति की मांग करता है। पिछले दशक में सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना में बड़े निवेश से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ में सुधार हुआ है। जयशंकर ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में कई उच्च गुणवत्ता वाले मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला, पूंजी प्रवाह और तकनीकी सहयोग को मजबूती मिली है। युवा जनसंख्या और कुशल मानव संसाधन भारत की बड़ी ताकत है। 5जी तकनीक, चंद्रयान मिशन, वंदे भारत ट्रेन और यूपीआई जैसे नवाचारों ने ‘न्यू इंडिया’ की पहचान स्थापित की है। अस्थिर वैश्विक माहौल में भारत एक विश्वसनीय और सक्षम साझेदार के रूप में उभर रहा है, ऐसा विश्वास विदेश मंत्री ने व्यक्त किया।
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