2030 तक दुर्घटनाएं आधी करने का लक्ष्य
मुंबई: राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग द्वारा किए जा रहे लगातार प्रयासों के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। जनवरी 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 8.05 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। जनवरी 2025 में जहां 1,427 लोगों की जान गई थी, वहीं जनवरी 2026 में यह संख्या घटकर 1,312 रह गई। यानी एक महीने में 115 जानें बची हैं। इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की कुल संख्या भी 3,164 से घटकर 3,100 हो गई है, जो करीब 2 प्रतिशत की कमी दर्शाती है।
सड़क सुरक्षा उपायों का असर कई जिलों में साफ दिखाई दिया है। नंदुरबार जिले में 50 प्रतिशत तक मृत्यु दर में कमी आई है। सोलापुर शहर और वाशिम में 36-36 प्रतिशत, सिंधुदुर्ग में 29 प्रतिशत, वर्धा में 28 प्रतिशत और धाराशिव में 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं गोंदिया और अमरावती ग्रामीण में 22 प्रतिशत तथा नांदेड और नागपुर शहर में 21 प्रतिशत तक मौतों में कमी आई है।
2030 तक आधी होंगी दुर्घटनाएं
परिवहन विभाग ने वर्ष 2030 तक राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत राज्य और जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा कक्ष बनाए गए हैं। हर जिले के लिए अलग-अलग सड़क सुरक्षा योजना तैयार कर उस पर अमल शुरू कर दिया गया है। दुर्घटना संभावित ‘ब्लैक स्पॉट्स’ पर सुधार कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।
नियम तोड़ने वालों पर सख्ती
राज्यभर में नियम उल्लंघन के खिलाफ 332 विशेष पथक तैनात किए गए हैं। रडार और इंटरसेप्टर वाहनों की मदद से बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही है। हेल्मेट न पहनने वाले 89,651 चालकों, पीछे बैठे बिना हेल्मेट वाले 13,348 यात्रियों, तेज रफ्तार के 8,520 और सीट बेल्ट न लगाने के 8,024 मामलों में कार्रवाई हुई है। अवैध पीयूसी, बीमा और ट्रिपल राइडिंग पर भी दंडात्मक कदम उठाए गए हैं। हेल्मेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता के लिए एआई और रडार तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है।
तकनीक और इलाज पर जोर
वाहनों की तकनीकी जांच के लिए 53 सरकारी और 13 निजी स्वचालित वाहन जांच केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। योग्य चालकों को ही लाइसेंस मिले, इसके लिए 38 स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक भी बनाए जाएंगे। करीब 25 हजार किलोमीटर सड़कों पर आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगाने का फैसला लिया गया है। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर इस प्रणाली के बाद दुर्घटनाओं में 19 प्रतिशत की कमी का दावा किया गया है।
गोल्डन आवर में इलाज की सुविधा
दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इलाज मिले, इसके लिए केंद्र सरकार की ‘पीएम राहत’ योजना राज्य में लागू की गई है। इसके तहत पात्र घायलों को सात दिन तक और डेढ़ लाख रुपए तक कैशलेस इलाज मिलेगा। आपात स्थिति में 112 नंबर पर कॉल कर एंबुलेंस और नजदीकी अस्पताल की जानकारी ली जा सकती है। पीड़ितों की मदद करने वाले ‘जीवनदूत’ को 25 हजार रुपए का इनाम देने का प्रावधान भी है। परिवहन विभाग के अपर आयुक्त भरत कलसकर के अनुसार, तकनीक आधारित सख्त अमल, कड़ी कार्रवाई और जनजागरूकता अभियानों के चलते सड़क हादसों में कमी आ रही है और राज्य 2030 तक दुर्घटनाएं आधी करने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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