मुंबई : सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ती बदनामी और साइबर उत्पीड़न की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार जल्द ही ठोस कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में जानकारी दी कि इस विषय पर अध्ययन करने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा।
महिलाओं की बदनामी और साइबर उत्पीड़न पर फोकस
विधानसभा में प्रश्नोत्तर काल के दौरान विधायक प्रशांत ठाकूर ने राज्य में साइबर सुरक्षा से जुड़ा सवाल उठाया। इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए बिना किसी ठोस सबूत के लोगों की बदनामी और साइबर उत्पीड़न के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को साइबर अपराधों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन महिलाओं को विशेष रूप से अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। इसलिए समिति को महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कानून में ठोस प्रावधान सुझाने के निर्देश दिए जाएंगे।
आईटी कानून में बदलाव पर होगा अध्ययन
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66ए जैसे प्रावधानों में सुप्रीम कोर्ट ने बदलाव किए हैं। अदालत के फैसलों का सम्मान करते हुए वर्तमान परिस्थितियों में साइबर अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण कैसे लगाया जाए, इस पर समिति अध्ययन करेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार कानून में संशोधन या नए प्रावधान लाने पर विचार करेगी।
साइबर ठगी रोकने के लिए 43 करोड़ का प्रावधान
इस दौरान गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने बताया कि बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए सरकार ने जनजागरूकता के लिए 43 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग में आर्थिक गड़बड़ी और ई-करेंसी के नाम पर होने वाली ठगी से बचाव के लिए नागरिकों को जागरूक किया जाएगा।
हर महीने भेजे जाएंगे 21 करोड़ जागरूकता संदेश
सरकार की इस जागरूकता मुहिम के तहत हर महीने राज्य के नागरिकों को लगभग 21 करोड़ जागरूकता संदेश भेजे जाएंगे, जिससे लोगों को साइबर अपराधों से बचने के तरीकों की जानकारी मिल सके।
कई विधायकों ने लिया चर्चा में हिस्सा
इस विषय पर विधानसभा में हुई चर्चा में विधायक विकास ठाकूर, बबन लोणीकर-यादव और राहुल कुल ने भी भाग लिया तथा साइबर अपराधों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

