मुंबई : महाराष्ट्र में फिलहाल कोई चुनाव नहीं होने के बावजूद शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के कुछ सांसदों के अलग गुट बनाने की अटकलों और 16 विधायकों तथा 7 सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने के दावों के बीच उद्धव ठाकरे ने डैमेज कंट्रोल की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 22 जून को सभी विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
शिंदे गुट के विधायक कृपाल तुमाने ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ठाकरे की शिवसेना के 16 विधायक और 7 सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। उनके अनुसार, इन नेताओं के साथ अंतिम स्तर की बातचीत पूरी हो चुकी है और अब केवल उनके शिंदे गुट में शामिल होने की तारीख तय होना बाकी है। तुमाने का दावा है कि उद्धव ठाकरे की कार्यशैली को लेकर उनकी पार्टी के नेताओं में नाराजगी है और इसी वजह से वे पाला बदलने की तैयारी में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।
सांसदों के अलग गुट की चर्चा से बढ़ी सियासी हलचल
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसद स्वतंत्र गुट बनाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि वे इस संबंध में जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप सकते हैं। इसी बीच ठाकरे गुट के सांसद संजय देशमुख की शिंदे गुट के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात की चर्चाओं ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
‘मातोश्री’ बैठक में सांसदों की अनुपस्थिति
संभावित बगावत की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे ने 14 जून को अपने निवास ‘मातोश्री’ में सभी नौ सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में केवल चार सांसद प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए थे, जबकि पांच सांसदों के ऑनलाइन जुड़ने का दावा सांसद संजय राउत ने किया था। राउत ने यह भी कहा था कि पार्टी का कोई भी सांसद शिवसेना (उद्धव गुट) छोड़कर नहीं जाएगा।
उद्धव ठाकरे बोले- जिसे जाना है, वह चला जाए
सांसदों की बैठक में उद्धव ठाकरे ने संभावित पार्टी टूट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिसे जाना है, वह खुशी खुशी जाए और मैं उनके अच्छे भविष्य की कामना करूंगा। उन्होंने कहा कि आज हमारा दिन अच्छा नहीं है, लेकिन आने वाला समय निश्चित रूप से हमारा होगा। ठाकरे ने कहा कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़कर गए हैं, उन्हें एक दिन जरूर पछतावा होगा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होगी। उन्होंने 2022 में हुई बगावत का जिक्र करते हुए कहा कि जब 40 विधायक पार्टी छोड़कर गए थे, तब भी उन्हें हालात की आहट थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव नहीं बनाया और न ही किसी को रोकने के लिए कोई दबाव की राजनीति की।
22 जून की बैठक से एकजुटता दिखाने की कोशिश
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने 22 जून को मुंबई के शिवालय में दोपहर 4 बजे सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक के जरिए वह पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
अंधारे ने साधा भाजपा- शिंदे गुट पर निशाना
शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता सुषमा अंधारे ने इन घटनाक्रमों को लेकर भाजपा और शिंदे गुट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले शिवसेना और बाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में इसी तरह टूट कराई गई और अब अन्य दलों के साथ भी ऐसी रणनीति अपनाई जा सकती है। सुषमा अंधारे ने कहा कि भाजपा स्वतंत्र रूप से चुनाव जीतने में सक्षम नहीं है, इसलिए वह विभिन्न तंत्रों का उपयोग कर दूसरे दलों के निर्वाचित नेताओं को अपनी ओर लाने का प्रयास करती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को अलग-अलग मुद्दों पर एक तय राजनीतिक कथा के साथ जनता के सामने पेश किया जाता है।
22 जून की बैठक पर टिकी राजनीतिक नजरें
शिवसेना (उद्धव ठाकरे) में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच अब सबकी नजर 22 जून को होने वाली विधायकों की बैठक पर है। इस बैठक से यह स्पष्ट हो सकेगा कि उद्धव ठाकरे पार्टी में एकजुटता बनाए रखने में कितने सफल होते हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में आगे क्या नया घटनाक्रम सामने आता है।
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