मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने और उनके सुधार में हो रही भारी देरी आम लोगों के लिए मुसीबत बन गई है. इसके चलते नागरिकों की शादी के पंजीकरण से लेकर विदेश जाने के लिए वीजा, प्रवेश और स्थाई निवास जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं अटक रही हैं.
क्या है मुख्य समस्या?
बीएमसी के पास पुराने रिकॉर्ड के सत्यापन का एक बड़ा बैकलॉग बन चुका है. मुंबई में जन्म और मृत्यु से जुड़े लगभग एक करोड़ पुराने रिकॉर्ड अभी भी डिजिटाइज होने बाकी हैं. नई नागरिक पंजीकरण प्रणाली के तहत आवेदन को मंजूर करने के लिए पंजीकृत मोबाइल पर ओटीपी आता है, जिसकी वैधता सिर्फ 60 सेकंड होती है. सीमित समय और पुराने हस्तलिखित रिकॉर्ड के कारण सत्यापन प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है.
लोगों पर पड़ रहा सीधा असर
प्रमाणपत्र मिलने में देरी के कारण नागरिकों के कई काम रुक गए हैं. उदाहरण के लिए, एक महिला को प्रमाणपत्र में सुधार न होने के कारण अपनी शादी का पंजीकरण टालना पड़ा. वहीं, एक अन्य परिवार के सदस्य का नीदरलैंड में स्थायी निवास का आवेदन भी अटक गया है. विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी वीजा और प्रवेश की समय-सीमा पूरी करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
बीएमसी द्वारा उठाए जा रहे कदम
इस संकट से निपटने के लिए बीएमसी ने सात अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार नियुक्त करने की मंजूरी मांगी है. इसके अलावा 26 चिकित्सा अधिकारियों और अस्पतालों के डीन को भी रजिस्ट्रार की शक्तियां देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है. प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए एक नया सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन ट्रैकिंग डैशबोर्ड भी विकसित किया जा रहा है, ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके.
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