मुंबई : महाराष्ट्र विधान परिषद में महिलाओं के गर्भाशय से अवैध रूप से बीजांड (ओवम/एग) निकालकर उनकी बिक्री से जुड़े गंभीर मामले पर व्यापक चर्चा हुई। विधान परिषद सदस्य चित्रा वाघ ने लक्षवेधी क्रमांक 8 के तहत यह मुद्दा उठाया और बदलापुर में सामने आए मामले का हवाला देते हुए सदन का ध्यान आकर्षित किया।
चर्चा के दौरान सामने आया कि गरीब महिलाओं को पैसों का लालच देकर उनके बीजांड निकाले गए और उन्हें बेचा गया। यह मामला न सिर्फ महिलाओं के स्वास्थ्य, बल्कि मानव तस्करी से भी जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर सदन में चिंता व्यक्त की गई।
डॉ. नीलम गोर्हे की सख्त टिप्पणी
विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे ने गृह राज्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और गायनेकोलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स एसोसिएशन से जुड़े कुछ डॉक्टरों पर पीसीपीएनडीटी कानून के उल्लंघन के मामले दर्ज होते हैं, लेकिन कई आरोपी डॉक्टर अपनी डिग्री रद्द होने से पहले ही दूसरे नाम से प्रैक्टिस जारी रखते हैं।
डॉ. गोर्हे ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे डॉक्टर जांच के दौरान गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, जिससे जांच प्रभावित होती है।
डिग्री तत्काल रद्द करने की मांग
उन्होंने सुझाव दिया कि मेडिकल काउंसिल को निर्देश देकर ऐसे दोषी डॉक्टरों की डिग्री तत्काल रद्द की जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो जांच में हस्तक्षेप होता रहेगा और समस्या बनी रहेगी।
आईवीएफ केंद्रों के लिए जिला स्तरीय समिति का प्रस्ताव
डॉ. गोर्हे ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) कानून की तर्ज पर आईवीएफ केंद्रों के नियमन और निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। इसमें पुलिस अधीक्षक और सिविल सर्जन की संयुक्त समिति शामिल हो।
राज्य स्तरीय समिति में महिला प्रतिनिधित्व
उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य स्तरीय समिति में सामाजिक संगठनों और विधान परिषद व विधानसभा की महिला लोकप्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लाइसेंस देने वाली ही समिति को निगरानी सौंपी जाए, तो निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी?
सरकार का सकारात्मक रुख
गृह राज्यमंत्री ने डॉ. नीलम गोर्हे के सुझावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए उनके अनुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। बदलापुर प्रकरण ने महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे और आईवीएफ केंद्रों के नियमन के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए।
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