ठाकरे ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
मुंबई: शहर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों का मुद्दा एक बार फर गरमाने लगा है। नवनिर्वाचित भाजपा महापौर रितु तावड़े ने शुक्रवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और अनधिकृत फेरीवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। मुंबई में घुसपैठ का यह मुद्दा अब सियासी जंग में बदल गया है। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है, जहां एक तरफ भाजपा प्रशासन कार्रवाई का दावा कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे केंद्र सरकार की नाकामी बता रहा है।
बीएमसी मुख्यालय में हुई इस बैठक में पूर्व सांसद किरीट सोमैया और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में खुलासा हुआ कि भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से घुसपैठिए खुद को भारती नागरिक साबित करने के लिए सरकारी दस्तावेज हासिल करने में सफल हो रहे हैं। पिछले चार महीनों में शहर में 276 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाए गए। सबसे ज्यादा मामले गोवंडी, कुर्ला और कालीना इलाकों में सामने आए हैं। महापौर तावड़े ने प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए कहा, “कई अधिकारी काम करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। अगर अधिकारी अनधिकृत बांग्लादेशियों को संरक्षण दे रहे हैं, तो उनके खिलाफ सदन में प्रस्ताव लाना पड़ेगा।” उन्होंने संबंधित विभागों को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए। किरीट सोमैया ने बैठक में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि करीब 10,000 लोगों के पास यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं है कि उनका जन्म भारत में हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया, “मानखुर्द और मुलुंड में ढाई हजार संदिग्ध नाम मिले हैं। 100 डॉक्टरों की सूची भी महापौर को सौंपी गई है, जो पैसे लेकर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी करते हैं।”
दो अधिकारी निलंबित
इस मामले में कार्रवाई भी शुरू हो गई है। महापौर रितु तावड़े ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र देने के आरोप में दो चिकित्सा अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और आठ लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जे वाले हर फेरीवाले के दस्तावेजों की जांच के लिए एक विशेष मुहिम चलाई जाएगी। वहीं, वर्सोवा पुलिस ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए बांग्लादेश के 21 नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें 18 किन्नर, एक महिला और दो पुरुष शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, ये लोग बेरोजगारी और भूखमरी से परेशान होकर पिछले 1 से 5 साल पहले भारत आए थे और मछली बेचने, डांस बार और देह व्यापार जैसे कामों में लिप्त थे।
सुरक्षा के लिए नई समितियों का गठन
इस बीच, उपनगर के सहपालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने घुसपैठ पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उनके सुझाव पर जिला नियोजन समिति ने विधानसभा स्तर पर ‘जनहित सुरक्षा समितियां’ गठित करने को मंजूरी दे दी है। ये समितियां फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड बनाने वालों और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की पहचान कर पुलिस और प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेंगी। मंत्री लोढ़ा ने कहा कि घुसपैठ रोकना समय की मांग है। उनके प्रयासों से पश्चिमी उपनगर में लगभग 15 एकड़ सरकारी जमीन (करीब 1000 करोड़ रुपये मूल्य की) अतिक्रमण मुक्त करा ली गई है।
आदित्य ठाकरे ने बताया केंद्र की नाकामी
इस पूरे अभियान पर शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने पूछा, “बांग्लादेशी भारत के एक छोर से भाजपा शासित राज्यों से होते हुए मुंबई तक कैसे पहुंचे? उन्होंने कहा केंद्र में एक दशक से भाजपा की सरकार है। ऐसे में यह राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी पूर्ण विफलता को दर्शाता है। इसे केंद्र सरकार की विफलता करार देते हुए कहा कि जो लोग पीओके लेने की बात करते हैं, वे घुसपैठ नहीं रोक पा रहे हैं। यदि इतनी बड़ी संख्या में घुसपैठिए मुंबई पहुंचे हैं, तो यह केंद्रीय गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों की हार है। ठाकरे ने मेयर पर तंज कसते हुए कहा कि वे बुनियादी नागरिक सुविधाओं (खराब सड़कें, कचरा और प्रदूषण) से ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को तूल दे रही हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या मेयर को लगता है कि गृह मंत्रालय भी उन्हीं के पास है?
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