मुंबई : महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार को राज्य की सत्ताधारी महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के मुंबई स्थित महाराष्ट्र प्रदेश कार्यालय तिलक भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सपकाल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के संरक्षण में ड्रग्स के कारखाने चल रहे हैं और आगामी नगर निकाय चुनावों में इस ‘ड्रग्स मनी’ का इस्तेमाल करने की भयावह साजिश रची जा रही है।
सत्ताधारियों के करीबियों पर गंभीर आरोप
सपकाल ने दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य का पतन हो रहा है। उन्होंने कहा, “सरकारी जमीन घोटाले और भ्रष्टाचार की कमाई कम पड़ने के बाद अब सत्ताधारी अपने करीबियों के माध्यम से नशीले पदार्थों के कारखाने चलवा रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी को नशे की गर्त में धकेला जा सके।”
40 बांग्लादेशियों को क्यों छोड़ा
सपकाल ने विशेष रूप से सतारा जिला स्थित उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पैतृक गांव दरे के पास पकड़े गए ड्रग्स का जिक्र करते हुए सरकार से कई तीखे सवाल पूछे: सपकाल ने खुलासा करते हुए कहा कि कुल 43 बंगाली बांग्लादेशी श्रमिकों को पकड़ा गए था. इनमें से 40 को बाद में छोड़ दिया उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या यह सच है कि इस मामले में कार्रवाई रोकने के लिए उपमुख्यमंत्री और ठाणे के एक सांसद ने पुलिस पर दबाव बनाया? गया। इस सब के पीछे किसका हाथ है? अजीत पवार गुट के पुणे छात्र संघ प्रमुख विशाल मोरे, जिसे 2 किलो MD ड्रग्स के साथ पकड़ा गया, उसके संबंध सत्ताधारी नेताओं से क्या हैं?
‘बांग्लादेशी घुसपैठ’ और सत्ता का दोहरा चेहरा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ सत्ताधारी दल बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ नारेबाजी करते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं बांग्लादेशियों को लाकर ड्रग्स के कारखाने चलवा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस के विधानसभा में दिए गए बयान—”ड्रग्स बनाना आसान है”—को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
नगर निकाय चुनावों की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि:मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और वार्ड रचना को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता खुद वार्ड रचना कर रहे हैं, फिर भी आयोग मौन है। हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव होना संभव नहीं लग रहा है।
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