मुंबई: कफ परेड पुलिस ने चंद रुपयों के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और डिग्री सर्टिफिकेट जैसे महत्वपूर्ण सरकारी और निजी दस्तावेजों का बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में गणेशमूर्ति नगर स्थित एक साइबर कैफे के मालिक को गिरफ्तार किया है।
संदिग्ध नागरिकता वाले बंगाली नागरिकों की आबादी मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में गंभीर चुनौती बन रही है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश से गरीब, बेरोजगार और अपराधी प्रवृत्ति वाले लोगों की योजनाबद्ध ढंग से मुंबई, महाराष्ट्र सहित पूरे भारत देश में घुसपैठ कराई जा रही है। जानकार इसे गजवा ए हिंद की रणनीति के तहत डेमोग्राफी बदलने का प्रयास मानते हैं। इसके लिए पहले घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल के 24 परगना, मिदना पुर, मुर्शिदाबाद आदि इलाकों से स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट, जन्म प्रमाणपत्र, वोटर कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड आदि उपलब्ध कराकर भारतीय नागरिक साबित किया जाता था। लेकिन इसका खुलासा होने के बाद अब घुसपैठिए झारखंड, छत्तीस गढ़, बिहार और उत्तर प्रदेश के नागरिक बनकर मुंबई और महाराष्ट्र में पहुंच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि संदिग्ध नागरिकता वाले ऐसे घुसपैठियों को अब मुंबई में भी ‘ भारतीय नागरिकता के फर्जी दस्तावेज आसानी से मिलने लगे हैं। ऐसा ही सनसनीखेज खुलासा मुंबई की कफ परेड पुलिस की एक कार्रवाई में हुआ है।
QR कोड ने खोला फर्जीवाड़े का राज
यह मामला तब प्रकाश में आया जब हसीना सफीकुल खातून नामक संदिग्ध नागरिकता वाली महिला ने अपने चरित्र सत्यापन (कैरेक्टर वेरिफिकेशन) के लिए पुलिस स्टेशन में आवेदन दिया। उसके द्वारा जमा किए गए जन्म प्रमाण पत्र के क्यू आर कोड को स्कैन किया, तो ‘दिस साइट कांट बी रिचड’ (इस साइट पर पहुंचना संभव नहीं है) ऐसा जवाब मिला। संदेह होने पर पुलिस ने अन्य दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच की। इस दौरान आधार कार्ड पर इस्तेमाल किए गए ‘फॉन्ट’ सामान्य आधार कार्ड से अलग थे। इसी तरह राशन कार्ड पर परिवार के मुखिया का नाम और पता की स्याही और लिखावट (हैंड राइटिंग) अलग होने का खुलासा हुआ। तो वहीं उत्तर प्रदेश शिक्षा परिषद द्वारा जारी 12वीं कक्षा के सर्टिफिकेट पर महिला की वर्तमान फोटो लगी थी और उसका क्यू आर कोड भी फर्जी पाया गया।
साइबर कैफे पर छापेमारी और गिरफ्तारी
जब पुलिस ने हसीना खातून को मूल दस्तावेजों के साथ बुलाया, तो वह कोई भी असली कागज पेश नहीं कर सकी। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने बताया कि ये सभी दस्तावेज उसने कफ परेड के ‘साह कम्युनिकेशन’ नामक साइबर कैफे से बनवाए थे। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद कफ परेड पुलिस की साइबर टीम ने कैफे पर छापा मारा और 21 वर्षीय सुजीत कुमार श्याम ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया।
7 अन्य लोगों के भी बनाए थे फर्जी कागजात
पुलिस को सुजीत के साइबर कैफे के कंप्यूटर में कई एडिटिंग टूल्स और सॉफ्टवेयर मिले, जिनका उपयोग फर्जी दस्तावेज और मुहर (स्टैम्प) बनाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सुजीत कुमार ने अब तक 7 अन्य व्यक्तियों के लिए भी इसी तरह के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। पुलिस ने कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव जब्त कर उसे फॉरेंसिक लैब भेज दिया है। आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में है और मामले की आगे की जांच जारी है।
पुलिस टीम की बड़ी सफलता
यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, सह-पुलिस आयुक्त सत्यनारायण चौधरी, अपर पुलिस आयुक्त डॉ. अभिनव देशमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कफ परेड पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक सतीश गायकवाड़ और उनकी टीम (स.पो.नि. अमित देवकर, पो.उ.नि. रूपेशकुमार भागवत व अन्य) द्वारा सफलतापूर्वक की गई।
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