मुंबई. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुकून की सांस ले रहे हिंदुस्तानियों को पाकिस्तान ने एक बार फिर से जोरदार झटका दिया. पाकिस्तान सुधार जाएगा ऐसा हिंदुस्तानियों का भ्रम राजधानी दिल्ली के लाल किला परिसर में सोमवार की शाम हुए जोरदार बम धमाके के बाद टूट गया है. लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट क्रमांक 1 पास खड़ी कार में हुए बम धमाके में 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है. तो वहीं दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं.
लाल किला क्षेत्र स्थित सुभाष मार्ग के पास के सिग्नल के पास एक बड़ा बम धमाका होने से सोमवार को अफरातफरी मच गई. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विस्फोट हुंडई i 20 कार में हुआ.

सामने आया पुलवामा कनेक्शन

पुलिस के मुताबिक, धमाका जिस हुंडई i-20 कार में हुआ, उसका नम्बर HR26-CE7674 था. यह कार मोहम्मद सलमान मोहम्मद शाहिद के नाम पर रजिस्टर्ड थी. कार की आरसी के अनुसार साल 2014 में इसका रजिस्ट्रेशन हुआ था. लेकिन पुलिस की पूछताछ में सलमान ने बताया कि उसने इस कार को लगभग डेढ़ साल पहले ओखला निवासी देवेंद्र को बेच दिया था. देवेंद्र ने पूछताछ के बताया कि उसने कुछ दिन पहले अपनी कार जम्मू कश्मीर के पुलवामा निवासी तारिक को बेच दी थी. दूसरी तरफ फोरेंसिक टीम कार की जांच करके ये जानने की कोशिश कर रही है कि धमाके के लिए किस विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया है. पुलिस कार के आने का मार्ग जानने तथा उसमें बैठे लोगों की शिनाख्त के लिए क्षेत्र के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेजों को खंगाल रही है.
लश्कर-ए-तैयबा की धमकी से बढ़ा संदेह
इस बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक बड़ा रहस्योद्घाटन हुआ है. जांच एजेंसियों को पता चला है कि लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख हाफ़िज सईद भारत के खिलाफ एक नई साजिश रच रहा है तथा हाफ़िज एक नए आतंकी हमले के लिए बांग्लादेश को लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है.
हड़बड़ी में किया आतंकी हमला
जानकारों का ये मानना है कि लालकिला परिसर में सोमवार को हुए आतंकी हमले को आतंकियों ने हड़बड़ाहट में अंजाम दिए होगा. क्योंकि हाल के दिनों में भारतीय जांच एजेंसियों की गुजरात के अहमदाबाद और हरियाणा के फरीदाबाद में की गई कार्रवाईयों से आतंकी डर गए होंगे. अहमदाबाद और फरीदाबाद में पकड़े गए आतंकी राजफाश कर सकते हैं इस डर से आतंकियों ने आनन फानन में लालकिला क्षेत्र में बम धमाका कर दिया.
हाल ही में हरियाणा और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में जम्मू-कश्मीर के रहने वाले दो डॉक्टरों डॉ. आदिल अहमद राठर और डॉ. मुजम्मिल शकील समेत सात लोग गिरफ्तार किया गया है. हरियाणा के फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. मुजम्मिल शकील साढ़े तीन साल से यूनिवर्सिटी कैंपस में रह रहा था. इसलिए पुलिस को अल फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन पर भी संदेह है. पुलिस ने फरीदाबाद में सर्च ऑपरेशन के दौरान फतेहपुर तगा से 2563 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया. इस विस्फोटक को 50 बोरो में भरकर रखा गया था. पुलिस टीम को जिस मकान से ये विस्फोटक मिला है. वह मस्जिद के इमाम इरफान का था. इमरान, डॉ. मुजम्मिल का करीबी बताया जा रहा है. उसन यह मकान चार साल पहले खरीदा था और उसे किसी परिवार को किराए पर दे रखा था. पुलिस ने आतंकियों के ठिकाने से तीन मैगजीन, आठ बड़े और तीन छोटे सूटकेसों में भरा विस्फोटक, दो रायफलें और वॉकी-टॉकी बरामद किया है. पुलिस के मुताबिक, यह आरडीएक्स नहीं बल्कि अमोनियम नाइट्रेट है, जिसका इस्तेमाल बड़े धमाके करने के लिए किया जा सकता था. इसी तरह पुलिस ने लखनऊ की डॉ. शाहीन शाहिद को भी टेरर कनेक्शन के मामले में गिरफ्तार किया है. डॉ. शाहीन की कार से एक एके-47 राइफल मिली है.

गुजरात एटीएस ने डॉक्टर सैयद अहमद को किया गिरफ्तार
गुजरात एटीएस ने डॉक्टर सैयद अहमद मोहयुद्दीन को गिरफ्तार किया है. उसने चीन से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है. उस पर खतरनाक जहर बनाने की योजना बनाने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, डॉक्टर मोहयुद्दीन, रिसिन के जरिए भारत पर केमिकल अटैक करना चाहता था. उसने अरंडी (कास्टर) के तेल से रिसिन एक्सट्रैक्ट करने की कोशिश की. रिसिन को स्प्रे या पाउडर बनाकर हवा में फैलाने की साजिश थी. पुलिस ने उसके पास से रिसिन नामक खतरनाक केमिकल बरामद किया है.
कितना घातक है रिसिन?
रिसिन को दुनिया का सबसे घातक प्राकृतिक जहर माना जाता है. रिसिन एक टॉक्सिन प्रोटीन है. यह प्रोटीन आधारित विष अरंडी के पौधे के बीजों से निकलता है. अरंडी के बीजों में 1-5% की मात्रा में रिसिन पाया जाता है. यह बीज सजावट या तेल बनाने के लिए इस्तेमाल होते हैं. मगर, इन बीजों को पीसकर निकला रिसिन शुद्ध जहर होता है. ये साइनाइड से भी 6,000 गुना ज्यादा जहरीला माना जता है. एक चम्मच रिसिन से 1 लाख लोग मर सकते हैं. CDC इसे कैटेगरी बी बायोटेररिस्ट एजेंट मानता है. अगर इसके असर की बात करें तो रिसिन का नमक के एक दाने जितना (2 मिलियनवां औंस) भी किसी इंसान की जान ले सकता है. रिसिन का कोई इलाज नहीं है. शुरुआती लक्षण पर अस्पताल में सपोर्टिव केयर (IV फ्लूइड, एंटी-नॉजिया) से बचाया जा सकता है. भारत में एनडीपीएस एक्ट के तहत रिसिन गैरकानूनी. विशेषज्ञ कहते हैं, ‘यह बायोटेरर का सस्ता हथियार है. इसे बनाना आसान है, लेकिन खतरा बहुत ही भयानक है. यदि यह सांस, खाने या इंजेक्शन से शरीर में जाता है तो यह कोशिकाओं की प्रोटीन संश्लेषण रोक देता है. शरीर प्रोटीन बनाने बंद कर देता है. इंसानों पर इसके लक्षण 4-6 घंटे में शुरू हो जाते हैं. इसका असर शुरू होते ही उल्टी, दस्त, बुखार, अंग फेल होना शुरू हो जाता है. साथ ही 36-72 घंटों में मौत तय है क्योंकि इसका कोई एंटीडोट नहीं बना है.
महाराष्ट्र और नागपुर में सुरक्षा कड़ी
दिल्ली धमाके का असर महाराष्ट्र में भी देखने को मिला है. मुंबई पुलिस ने सभी थानों को सतर्क कर दिया है और संवेदनशील स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है. नागपुर पुलिस ने भी आरएसएस मुख्यालय और रेशमबाग स्मृति मंदिर के आसपास सख्त निगरानी शुरू कर दी है. स्थानीय प्रशासन ने सभी प्रवेश मार्गों पर जांच चौकियाँ लगा दी हैं.
देशभर में खुफिया एजेंसियां सक्रिय
धमाके की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा संयुक्त रूप से जांच में जुटी हैं. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इस धमाके के पीछे किसी आतंकी संगठन का हाथ हो सकता है. फिलहाल, कार के अवशेषों और सीसीटीवी फुटेज की जांच जारी है.
