मुंबई: मुंबई हाईकोर्ट ने दिशा सालियन की संदिग्ध परिस्थितियों में ही मौत से जुड़े मामले में अंतिम जांच रिपोर्ट पेश करने में हो रही देरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नए सबूतों का हवाला देकर जांच रिपोर्ट को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता। कोर्ट ने जांच एजेंसियों से पूछा कि आखिर रिपोर्ट दाखिल करने में इतनी देर क्यों हो रही है।
पेन ड्राइव के बहाने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा पेन ड्राइव के माध्यम से कुछ नए सबूत दिए गए हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। इसी कारण अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। हालांकि, इस दलील से असंतुष्ट कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक पेन ड्राइव की जांच में इतना समय कैसे लग सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यह कारण देरी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।
CRPC का हवाला देते हुए 24 घंटे की समय सीमा
हाईकोर्ट ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 174 का हवाला देते हुए कहा कि नए सबूतों के आधार पर जांच रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर दाखिल की जानी चाहिए। अदालत ने इस प्रावधान की याद दिलाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह तय समय सीमा का पालन करे और रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश करे।
SIT अधिकारियों को पेश होने का आदेश
कोर्ट ने इस मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी भूमिका स्पष्ट करने का आदेश दिया है। हालांकि, राज्य सरकार की मांग पर अदालत ने सुनवाई को दो सप्ताह के लिए स्थगित भी कर दिया है।
पिता की याचिका में गंभीर आरोप
दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले में हत्या का केस दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि मामले को जल्दबाजी में बंद करने की कोशिश की गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया गया या उनके साथ छेड़छाड़ की गई।
जांच प्रक्रिया पर उठते अहम सवाल
याचिका में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि दिशा का अंतिम संस्कार जल्दबाजी में किया गया, जबकि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण सबूतों की ठीक से जांच नहीं की गई। साथ ही, याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि संभावित आपराधिक साजिश को छिपाने के लिए फॉरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी गड़बड़ी की गई हो सकती है।
पुलिस का दुर्घटनावश मौत का दावा
दूसरी ओर, मालवणी पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा है that जांच के दौरान किसी भी प्रकार की साजिश या हत्या के सबूत नहीं मिले हैं। पुलिस के अनुसार, यह एक दुर्घटनावश मौत का मामला है और इसलिए इसमें हत्या का केस दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है। पुलिस ने अदालत से याचिका खारिज करने की मांग भी की है।
अधूरी जांच के बीच बढ़ा विवाद
सरकारी पक्ष का कहना है कि प्राथमिक जांच रिपोर्ट तैयार है, लेकिन कुछ पहलुओं की जांच अभी भी जारी है। इसी वजह से अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं की गई। हालांकि, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब इस मामले में जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।
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