नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि पिछले साल 2024 में दुनिया भर में हर 10 मिनट में एक महिला की हत्या उसके किसी करीबी व्यक्ति ने की। इस तरह से लगभग 50,000 महिलाओं और लड़कियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। संयुक्त राष्ट्र ने महिला हिंसा के खिलाफ लड़ाई में कोई प्रगति नहीं होने पर भी गहरा खेद व्यक्त किया है।
संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) और यूएन वीमेन (UN Women) ने महिला हिंसा उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर जारी एक रिपोर्ट में बताया है कि 2024 में लगभग 50,000 महिलाओं और लड़कियों की हत्या उनके किसी करीबी या परिवार के सदस्यों द्वारा की गई। दुनिया भर में 60% महिलाओं की हत्या उनके रिश्तेदारों ने ही की।
चौंकाने वाले आंकड़े
117 देशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यह 50,000 का आंकड़ा हर दिन 137 महिलाओं या हर 10 मिनट में एक महिला की हत्या का संकेत देता है। हालांकि यह कुल संख्या 2019 की तुलना में थोड़ी कम लगती है, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कमी वास्तव में घटौती नहीं है। यह मुख्य रूप से देश-वार डेटा उपलब्धता में अंतर के कारण ऐसा दिख रहा है।
घर महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगह
रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल हजारों महिलाएं और लड़कियां नारी हत्या (Femicide) का शिकार होती हैं और इसमें सुधार का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, “हत्या के जोखिम के मामले में घर महिलाओं और लड़कियों के लिए सबसे खतरनाक जगह बना हुआ है।”
अफ्रीका में संख्या चिंताजनक
दुनिया के सभी देशों में महिलाओं की हत्याएं होती हैं, लेकिन पिछले वर्ष यानी 2024 में अफ्रीका में महिलाओं की हत्याओं की संख्या सबसे अधिक थी, जहां लगभग 22,000 महिलाओं ने अपनी जान गंवाई।
आधुनिक तकनीक से हिंसा को बढ़ावा
संयुक्त राष्ट्र महिला नीति विभाग की निदेशक सारा हेंड्रिक्स ने एक बयान में कहा:
“नारी हत्या कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है। हत्या से पहले उसे अक्सर धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।”
आधुनिक तकनीक के विकास ने महिलाओं और लड़कियों पर होने वाली कुछ प्रकार की हिंसा को बढ़ावा दिया है। अनजाने में सोशल मीडिया पर फोटो साझा करना, डॉक्सिंग और डीपफेक वीडियो जैसे नए तरीकों से मानसिक उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। हेंड्रिक्स ने आगे कठोर कानूनों को लागू करने और अपराधियों को जिम्मेदार ठहराने का आह्वान किया है ताकि मामले को जानलेवा होने से पहले ही रोका जा सके।

