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Home»Featured»शुरू हो गया चंद्र ग्रहण का सूतक काल : जानिए समय, प्रभाव और जरूरी धार्मिक सावधानियां
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शुरू हो गया चंद्र ग्रहण का सूतक काल : जानिए समय, प्रभाव और जरूरी धार्मिक सावधानियां

Team Tah ki BaatBy Team Tah ki BaatMarch 3, 2026No Comments4 Mins Read
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मुंबई: साल 2026 के पहले चंद्र ग्रहण का सूतक काल 2 मार्च 2026 मंगलवार को प्रातः 9 बजे से शुरू हो गया है। यह चंद्र ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल भी मान्य माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है।
क्या होता है चंद्र ग्रहण?
विज्ञान के अनुसार, ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना गया है। चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। लेकिन ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है, इसलिए ग्रहण का प्रभाव मानसिक स्थिति, भावनाओं और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है।
चंद्र ग्रहण 2026 का समय
ग्रहण प्रारंभ: 3 मार्च 2026, दोपहर 3:20 बजे
ग्रहण समाप्त: शाम 6:46 बजे
कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 27 मिनट
भारत में दिखेगा सिर्फ अंतिम चरण
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्रमा शाम 5:59 बजे उदय होगा, जबकि ग्रहण पहले ही दोपहर 3:20 बजे शुरू हो चुका होगा।
ऐसे में भारत में चंद्र ग्रहण का केवल अंतिम चरण ही दिखाई देगा। ग्रहण का मध्य काल शाम 5:04 बजे और समाप्ति समय 6:47 बजे रहेगा।
कहां-कहां दिखाई देगा यह ग्रहण?
भारत के पूर्वी हिस्सों में यह ग्रहण अपेक्षाकृत साफ दिखाई देगा। इसके अलावा यह चंद्र ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी देखा जा सकेगा।
सूतक काल कब से शुरू?
धार्मिक मान्यता है कि सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे और चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले शुरू होता है। इस बार चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से लगेगा, इसलिए दुनिया के अन्य हिस्सों में सूतक काल प्रातः 6.20 से ही शुरू हो जाएगा लेकिन भारत में ग्रहण अंतिम चरण में दिखाई देने की वजह से सूतक काल प्रातः 9 बजे से मान्य होगा।
सूतक काल में क्या न करें?
सूतक के दौरान खाना-पीना वर्जित माना गया है
नकारात्मक और तामसिक कार्यों से बचें
नए काम या बड़े निर्णय न लें
सात्विक भोजन और सकारात्मक विचार अपनाएं
भोजन में तुलसी क्यों डाली जाती है?
ग्रहण या सूतक काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। ऐसे में पहले से बने भोजन को सुरक्षित रखने के लिए उसमें तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं। हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है और आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है।
ग्रहण के बाद तुलसी का क्या करें?
ग्रहण समाप्त होने के बाद तुलसी के पत्तों को भोजन से अलग निकालकर फेंकने की आवश्यकता नहीं होती।
स्नान और पूजा-पाठ के बाद उस भोजन को तुलसी सहित ग्रहण किया जा सकता है। मान्यता है कि तुलसी ने भोजन को नकारात्मक प्रभाव से बचाया होता है, इसलिए उसका सेवन शुभ माना जाता है।
चंद्र ग्रहण का मानसिक और वैश्विक प्रभाव
ज्योतिषीय संकेत : ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण का सबसे अधिक असर मन और भावनाओं पर पड़ता है। इस दौरान तनाव, भ्रम और नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं।
सिंह राशि में लग रहा यह ग्रहण सत्ता, राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर भी प्रभाव डाल सकता है। कुछ ज्योतिषाचार्य इसे राजनीतिक उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय तनाव से जोड़कर देखते हैं।
ग्रहण के बाद भोजन को लेकर क्या करें?
ग्रहण के दौरान ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। हालांकि जिन खाद्य पदार्थों में पहले से तुलसी डाली गई हो, उन्हें ग्रहण के बाद स्नान और पूजा के उपरांत खाया जा सकता है। फिर भी कई लोग एहतियात के तौर पर नया भोजन बनाना ही उचित मानते हैं।

डिस्क्लेमर: यह आलेख धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय गणनाओं और पंडितों/शास्त्रों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है। इसमें दी गई सूतक, ग्रहण और उसके प्रभाव से जुड़ी बातें आस्था और परंपराओं से संबंधित हैं। ‘तह की बात का’ उद्देश्य इस आलेख के जरिए किसी वैज्ञानिक या चिकित्सकीय सलाह का विकल्प देना या अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। पाठक किसी भी निर्णय से पहले अपनी विवेकपूर्ण समझ और विशेषज्ञ सलाह अवश्य लें।

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Team Tah ki Baat

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