संस्कार एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण हेतु संस्कृति संवर्धन प्रतिष्ठान का अभिनव उपक्रम
मुंबई: हाल के समय में समाज के सभी क्षेत्रों में नैतिक मूल्यों का तेजी से ह्रास होता दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में भावी पीढ़ी को सुसंस्कृत एवं नैतिक मूल्यों का बोध कराने के उद्देश्य से श्रीमद रामायण, महाभारत, संत कथाएँ तथा क्रांतिकारियों की जीवन गाथाओं जैसे विषयों पर हाल ही में विद्यालयीन विद्यार्थियों की परीक्षा आयोजित की गई। संस्कृति संवर्धन प्रतिष्ठान, महाराष्ट्र-गोवा की ओर से आयोजित इस परीक्षा में महाराष्ट्र और गोवा के लगभग डेढ़ लाख से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता दर्ज कर संस्कृति संरक्षण का संकल्प व्यक्त किया। उल्लेखनीय यह है कि इसमें अन्य धर्मों के विद्यार्थियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया, ऐसी जानकारी प्रतिष्ठान के विश्वस्त मोहन सालेकर ने दी।

सालेकर ने आगे कहा, “वर्तमान समय में सनातन संस्कृति को जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। अनेक युवक-युवतियाँ भजन क्लबों के माध्यम से अपनी संस्कृति के जागरण का कार्य कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि संस्कृति संवर्धन प्रतिष्ठान की ओर से महाराष्ट्र और गोवा की कुल 1470 विद्यालयों में एक ही दिन और एक ही समय पर यह परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा की तैयारी हेतु विद्यार्थियों को रामायण, महाभारत एवं संत कथाएँ सुनाई और दिखाई गईं। उसी अध्ययनक्रम के आधार पर 60 अंकों की वस्तुनिष्ठ लिखित परीक्षा ली गई। परीक्षा में सहभागी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यालयों को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक विद्यालय एवं प्रत्येक कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को आकर्षक ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। साथ ही 50 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को आकर्षक प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।

23 वर्षों से चल रहा उपक्रम
प्रतिष्ठान की संयोजिका नम्रता पुंडे द्वारा जारी विज्ञप्ति में सालेकर ने बताया कि परीक्षा के नियोजन हेतु 5000 शिक्षकों सहित 1450 कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। संस्कारित पीढ़ी के निर्माण के उद्देश्य से पिछले 23 वर्षों से यह उपक्रम निरंतर संचालित किया जा रहा है और इसे मिल रहा प्रतिसाद दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।


