टिकट कटने से मचा सियासी गलियारे में हड़कंप!
मुंबई. बीएमसी(मुंबई महानगरपालिका) के आगामी चुनावों के लिए मंगलवार को आरक्षण की लॉटरी निकाली गई. लॉटरी के परिणामों की घोषणा के साथ ही मुंबई के सियासी गलियारे में हड़कंप मच गया. क्योंकि लॉटरी में कई दिग्गजों पर आरक्षण की गाज गिरी है. इस आरक्षण प्रक्रिया के कारण कई राजनीतिक दलों के दिग्गज और अनुभवी नेता अपने पिछले चुनाव क्षेत्र से इस बार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे.
बीएमसी के 227 वार्डों के लिए घोषित इस आरक्षण के बाद, कई वर्तमान और पूर्व नगरसेवकों के वार्ड महिलाओं या आरक्षित श्रेणियों के लिए आरक्षित हो गए हैं. ऐन चुनाव से पहले हुए इस बदलाव से अब ये दिग्गज ‘सुरक्षित’ या अनुकूल वार्ड तलाशने को मजबूर हो गए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि लॉटरी के ये परिणाम आने वाले बीएमसी चुनावों को अप्रत्याशित बना सकते हैं.
ऐसी है वार्डों के आरक्षण की व्यवस्था
मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई महापालिका के कुल 227 वार्डों में से 114 वार्ड (50 प्रतिशत से अधिक) महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं. इसके अलावा 78 वार्ड आरक्षित श्रेणियों के लिए निर्धारित किए गए हैं. इनमें 15 वार्ड अनुसूचित जाति (एससी) और 2 वार्ड अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं. सबसे अधिक 61 वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित हुए हैं.
🚨 इन दिग्गजों को लगा बड़ा झटका
लॉटरी के बाद आरक्षण का झटका सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के अनुभवी नेताओं को लगा है:
तेजस्विनी घोसालकर (पूर्व नगरसेविका): उनका वार्ड (क्र. 1) ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है, जिससे उन्हें नया ठिकाना खोजना पड़ेगा.
नील सोमैया (भाजप नेता किरीट सोमैया के पुत्र): उनका वार्ड (क्र. 108) भी ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है.
आशिष चेंबुरकर (ठाकरे गुट, वर्ली): उनका वार्ड (क्र. 196) सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है.
सुरेश पाटिल (ठाकरे गुट, घाटकोपर): उनका वार्ड (क्र. 127) सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है.
स्नेहल आंबेकर (मुंबई की पूर्व महापौर, ठाकरे गुट): उनके वार्ड (क्र. 198) पर ओबीसी महिला आरक्षण रहेगा.
यशवंत जाधव (शिंदे गुट, चार बार स्थायी समिति अध्यक्ष): उन्हें भी बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उनका वार्ड (क्र. 209) सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है.
मकरंद नार्वेकर (भाजप पूर्व नगरसेवक): उनका वार्ड (क्र. 227) सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है.
रवि राजा (कांग्रेस के पूर्व विरोधी पक्ष नेता): उनका वार्ड (क्र. 176) ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है, जिससे कांग्रेस को भी महत्वपूर्ण सीट पर पुनर्विचार करना पड़ेगा.
🔮 आगामी रणनीति: नए समीकरण और वारिसों की बारी
आरक्षण की इस घोषणा से मुंबई की राजनीति में बड़ी हलचल शुरू हो गई है. माना जा रहा है कि सभी राजनीतिक दलों को चुनाव से पहले वार्डों और उम्मीदवारों के नए समीकरण बनाने पड़ेंगे. इनमें से कई अनुभवी, वरिष्ठ और पुराने नेताओं के सामने अब दो मुख्य विकल्प हैं:
पड़ोस के वार्डों में जाकर चुनाव लड़ना. अपनी पत्नी या बेटी को चुनाव मैदान में उतारकर अपने राजनीतिक विरासत को बचाए रखना.
