कोर्ट सख्त, 1 अप्रैल तक बढ़ी कस्टडी
नासिक के कुख्यात ढोंगी तांत्रिक अशोक खरात की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिला न्यायालय ने आरोपी की पुलिस कस्टडी 1 अप्रैल तक बढ़ा दी है। कोर्ट ने माना कि मामला गंभीर है और जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए SIT को अतिरिक्त समय देना जरूरी है।
मोबाइल में ‘डमी नाम’ का रहस्य
जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कई प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं के नंबर ‘कोड नेम’ या डमी पहचान से सेव पाए गए हैं। इन नामों के पीछे असली पहचान उजागर करना अब SIT के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
जांच में नहीं कर रहा सहयोग
सरकारी वकील के मुताबिक अशोक खरात पूछताछ में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहा है। महिलाओं के शोषण से जुड़े सवालों पर वह गोलमोल जवाब देता है और जांच को भटकाने की कोशिश करता है। इसी वजह से SIT को आमने-सामने पूछताछ के लिए और समय लेना पड़ा।
‘प्रसाद’ के नाम पर नशीला जाल
मामले का एक बेहद भयावह पहलू सामने आया है। आरोपी महिलाओं को प्रसाद के रूप में नशीले पेड़े और कड़वा पानी देता था। इसके सेवन के बाद महिलाएं अर्ध-बेहोशी की स्थिति में पहुंच जाती थीं, जिसका फायदा उठाकर उनका शोषण किया जाता था। फिलहाल इन पदार्थों की केमिकल जांच जारी है।
डिजिटल सबूतों में छिपा नेटवर्क
फॉरेंसिक टीम ने मोबाइल डेटा की क्लोन कॉपी तैयार कर ली है। जांच में 300 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो सामने आए हैं, जो कम समय में बनाए गए बताए जा रहे हैं। इससे एक संगठित रैकेट की आशंका और गहरा गई है।
‘ओकस प्रॉपर्टी’ बना मुख्य अड्डा
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि ‘ओकस प्रॉपर्टी’ आरोपी के सभी अवैध और अनैतिक कामों का मुख्य केंद्र था। यहीं से पूरे नेटवर्क को संचालित किए जाने की आशंका है।
संपत्ति और पैसों की परतें खुलेंगी
SIT अब आरोपी की आर्थिक गतिविधियों की भी गहराई से जांच कर रही है। बेनामी संपत्तियों, संदिग्ध लेनदेन और अन्य लोगों की भूमिका को खंगाला जा रहा है। आयकर और पंजीकरण विभाग से भी जानकारी मांगी गई है।
विदेश यात्राओं पर भी सवाल
आरोपी की विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। पासपोर्ट कार्यालय से जानकारी मांगी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन दौरों के पीछे का असली मकसद क्या था।
बचाव पक्ष की दलील
आरोपी के वकील ने कोर्ट में कहा कि पुलिस बार-बार एक ही कारण बताकर कस्टडी बढ़ाने की मांग कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक कई अहम सबूत क्यों जब्त नहीं किए गए।
जांच का दायरा लगातार बढ़ा
मामले में नई-नई पीड़ित महिलाएं सामने आ रही हैं, जिससे केस और गंभीर होता जा रहा है। SIT को शक है कि यह एक बड़ा संगठित शोषण रैकेट हो सकता है।
आगे क्या?
आने वाले तीन दिन इस केस के लिए बेहद अहम हैं। ‘कोड नेम’ का रहस्य, डिजिटल सबूत और आर्थिक कड़ियों को जोड़कर SIT इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की तैयारी में है। अगर ये राज खुलते हैं, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
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