मुंबई. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के नवनियुक्त संपर्क प्रमुखों और विभागीय संपर्क प्रमुखों के साथ एक ऑनलाइन बैठक कर पार्टी संगठन की गहन समीक्षा की. इस बैठक में शिंदे ने पदाधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में अल्टिमेटम देते हुए कहा कि जो काम करेंगे, वही पद पर बने रहेंगे और जो नहीं करेंगे, उनकी छट्टी कर दी जाएगी. इस दौरान शिंदे ने स्पष्ट संदेश दिया कि क्वांटिटी नहीं, काम की क्वालिटी चाहिए. जो पार्टी का काम करेंगे, उन्हें ही बड़े पदों पर मौका मिलेगा.”
बैठक में एकनाथ शिंदे ने मंत्री, विधायक और सांसद जैसे बड़े पदों को दरकिनार रखते हुए सभी को एक कार्यकर्ता की तरह मैदान में उतरकर काम करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पार्टी के विस्तार के लिए हर किसी को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी. शिंदे ने प्रत्येक संपर्क प्रमुख से सीधे सवाल पूछते हुए उनके काम का हिसाब मांगा. अब तक कितने बीएलए नियुक्त किए, क्षेत्र में कितनी बार दौरा किया और कितनी बैठकें हुईं, इसकी विस्तृत जानकारी मांगी गई.
रोजाना रिपोर्ट देना अनिवार्य
शिंदे ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि सभी संपर्क प्रमुखों और पदाधिकारियों को नियमित रूप से कामकाज की रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा. हर बैठक की फोटो और ब्योरा रोजाना प्रस्तुत करना होगा. यदि काम की अपडेट नहीं मिली तो सीधे पद से हटाया जाएगा. पुणे में शिवसेना की पूरी कार्यकारिणी पहले ही बर्खास्त की जा चुकी है, जिसे राज्यभर के पदाधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है.
43 हजार गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य
शिंदे ने महाराष्ट्र के सभी 43 हजार गांवों में शिवसेना की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है. संभावित निर्वाचन क्षेत्र विभाजन को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक मतदाता सूची पर दो बीएलए नियुक्त करने और उनके साथ नियमित बैठकें करने के निर्देश दिए गए हैं. हाल ही में 48 लोकसभा संपर्क प्रमुखों की भी घोषणा की गई है.
बीजेपी की तर्ज पर संगठन विस्तार
सूत्रों के अनुसार शिंदे ने संकेत दिया है कि भाजपा जिस तरह से संगठन विस्तार करती है, उसी मॉडल पर शिवसेना आगे बढ़ेगी. अगले तीन वर्षों तक कोई बड़ा चुनाव नहीं होने के कारण पूरा ध्यान मतदाता सूचियों पर केंद्रित करने को कहा गया है, ताकि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी पूरी तरह तैयार रहे.

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