12 राज्यों में पहले से लागू
उद्धव गुट ने किया समर्थन
विपक्ष ने उठाए सवाल
मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार को ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’ (धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक) पर जमकर बहस हुई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में साफ किया कि यह कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि ठगी, लालच और दबाव से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए लाया गया है। इस दौरान एनसीपी (शरद गुट) के नेता जितेंद्र आव्हाड के एक बयान पर बवाल मच गया, जिसके बाद उन्हें सदन में माफी मांगनी पड़ी।
‘सुरक्षा कवच है ये कानून, अराजकता नहीं’
विधेयक का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि देश के 12 राज्यों में इस तरह का कानून पहले से लागू है। उन्होंने कहा, “संविधान धर्म बदलने की आज़ादी देता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि राज्य स्तर पर इस संबंध में कानून बनाए जा सकते हैं। केंद्र ने भी राज्यों को ऐसा कानून बनाने का सुझाव दिया था।” उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक जबरन, फर्जीवाड़े या प्रलोभन देकर किए जाने वाले धर्मांतरण को अवैध घोषित करता है, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विधेयक की मुख्य बातें:
अवैध धर्मांतरण की परिभाषा: बल, दबाव, लालच, धोखे या नाबालिग का धर्म परिवर्तन कराना अवैध होगा।
सख्त सजा का प्रावधान: दोषियों को 1 लाख रुपये जुर्माना और 7 साल तक की कैद हो सकती है। एससी/एसटी पीड़ितों के मामले में जुर्माना 5 लाख रुपए तक बढ़ जाएगा। सामूहिक अपराध और बार-बार अपराध करने पर सजा और भी सख्त होगी।
विवाह पर असर: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अवैध धर्मांतरण कराकर किया गया विवाह अमान्य होगा। ऐसे में जन्मे बच्चे का धर्म मां का होगा, लेकिन उसे पिता की संपत्ति में अधिकार मिलेगा और उसकी कस्टडी मां के पास होगी।
शिकायत दर्ज कराना: किसी भी रक्त संबंधी या पुलिस (सुओ-मोटो) द्वारा शिकायत दर्ज कराने का प्रावधान।
विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रियाएं:
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट): पार्टी नेता भास्कर जाधव ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा, “हमने इसे पढ़ा है, यह किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं है। जबरन धर्मांतरण रोकना जरूरी है।” उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के धर्मांतरण का जिक्र करते हुए कानून के दुरुपयोग से बचने की सलाह दी।
कांग्रेस: विधायक अस्लम शेख ने कहा कि ‘प्रलोभन’ की परिभाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे प्रेम विवाह में भी इसका दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने इसे अन्य राज्यों के बाद लाने की आवश्यकता पर सवाल उठाया।
समाजवादी पार्टी: विधायक रईस शेख ने इसे एकतरफा और एक विशेष धर्म को लक्षित करने वाला बताते हुए विरोध जताया।
‘मैंने बेटी ईसाई परिवार में दी’ : आव्हाड
एनसीपी (शरद पवार) के जितेंद्र आव्हाड ने विधेयक को ‘धर्म नियंत्रण कानून’ बताते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जातिवाद की दीवारें तोड़नी हैं तो अपनी बेटी दूसरे समुदाय में ब्याहिए। मैंने अपनी बेटी की शादी एक ईसाई परिवार में की है।” इसी दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक पर दिए एक बयान से भाजपा विधायक भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आव्हाड ने शिवाजी महाराज का अपमान किया है।
आव्हाड ने मांगी माफी
हंगामा बढ़ता देख स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। बहाली के बाद आव्हाड ने कहा, “अगर मेरे बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूं और खेद व्यक्त करता हूं।” स्पीकर ने इसे स्वीकार करते हुए मामले को रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया।
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