मुंबई. उत्तर मुंबई के सांसद और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के सक्रिय हस्तक्षेप के बाद ₹246 करोड़ की लागत वाली ‘दहिसर नदी पुनर्जीवन परियोजना’ अपने निर्णायक दौर में पहुँच गई है। मई 2024 में कार्यभार संभालने के बाद से ही गोयल ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निरंतर समीक्षा बैठकें और फॉलो-अप किए, जिसका परिणाम अब धरातल पर दिखने लगा है।
अत्याधुनिक तकनीक से सुधरेगी जल गुणवत्ता
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य सीवेज के बहाव को रोकना और नदी के प्रदूषित जल को शुद्ध कर प्रवाह को स्वच्छ बनाना है। परियोजना के तहत दहिसर नदी के किनारे अत्याधुनिक ‘मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर’ (MBR) तकनीक पर आधारित दो स्वचालित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए गए हैं। इंदिरा नगर में 5.0 MLD और सुकुरवाड़ी में 1.5 MLD क्षमता वाले इन संयंत्रों का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। वर्तमान में ये कमीशनिंग और हैंडओवर के चरण में हैं। इन संयंत्रों से उपचारित जल का उपयोग बागवानी और सड़क सफाई जैसे गैर-पेय कार्यों के लिए किया जाएगा, जिससे जल प्रबंधन में स्थिरता आएगी।
दशकों पुराने संकट का समाधान
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से मनोरी खाड़ी तक बहने वाली 12 किलोमीटर लंबी दहिसर नदी पिछले कई दशकों से अतिक्रमण और कचरे के कारण दम तोड़ रही थी। 2005 की भीषण बाढ़ के बाद चितले समिति ने इसके पुनर्जीवन की सिफारिश की थी। हालांकि, लंबे समय तक यह योजना सुस्त रही, लेकिन पिछले डेढ़ साल में पीयूष गोयल के ‘डिलीवरी मॉडल’ और मल्टी-डिपार्टमेंट रिव्यू मैकेनिज्म के कारण इसके क्रियान्वयन में अभूतपूर्व तेजी आई है। इसके अंतर्गत 4.75 किमी नदी क्षेत्र का सुधार और 4.4 किमी लंबी नई सीवर लाइन का निर्माण कार्य भी शामिल है।
स्वच्छ और सुरक्षित उत्तर मुंबई का विजन
परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और राज्य सरकार के सहयोग से यह परियोजना जनस्वास्थ्य की रक्षा और जल प्रबंधन को मजबूत करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिकता दहिसर क्षेत्र में बाढ़ की समस्या को रोकना और स्थानीय निवासियों की कठिनाइयों को कम करना है। यह परियोजना न केवल नदी के पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करेगी, बल्कि उत्तर मुंबई के पर्यावरण के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
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