मुंबई: सरकारी राशन की दुकानों से मिलने वाले अनाज घटिया क्वालिटी और मिलावटखोरी के लिए हमेशा बदनाम रहे हैं। यही वजह है कि मुंबई में इन दिनों राशन की दुकानों में मिलनेवालेव चावल चर्चा का विषय बने हुए हैं। वजह यह है कि राशन के चावल में कुछ अलग तरह के दाने मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई लोग इन दानों को “प्लास्टिक चावल” समझकर घबराहट व्यक्त कर रहे हैं।
राशन के चावलों में मिलने वाले विशिष्ट दाने कच्चा चबाने पर कुछ हद तक प्लास्टिक चबाने जैसा प्रतीत होते हैं। चीन निर्मित प्लास्टिक के चावलों की अफवाह पहले ही सोशल मीडिया पर फैली हुई है। इसलिए लोग राशन के चावलों में से विशिष्ट दानों को चुनकर फेंक रहे हैं। लेकिन सरकारी राशन के चावल में दिखने वाले अलग सफेद दाने प्लास्टिक नहीं, बल्कि पोषण बढ़ाने के लिए बनाए गए फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स हैं, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों के अनुसार ये दाने प्लास्टिक नहीं, बल्कि फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स (FRK) हैं।
क्या होते हैं फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स (FRK)?
फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स ऐसे विशेष चावल के दाने होते हैं, जिन्हें पोषण बढ़ाने के लिए तैयार किया जाता है। इसके लिए टूटे हुए चावल को पहले पीसकर आटा बनाया जाता है। इसके बाद उसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। फिर इस मिश्रण को एक्सट्रूडर मशीन से चावल के दाने जैसे आकार में बनाया जाता है। इन्हें सामान्य चावल के साथ लगभग 1:100 के अनुपात में मिलाया जाता है।
क्यों मिलाए जाते हैं ऐसे दाने?
सरकार ने देश में कुपोषण और एनीमिया की समस्या को कम करने के लिए फोर्टिफाइड चावल की योजना शुरू की थी। इन दानों में मौजूद पोषक तत्व विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों में आयरन की कमी और एनीमिया की समस्या को कम करने में मदद करते हैं।
‘प्लास्टिक चावल’ की अफवाह कैसे फैली?
फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स का रंग और बनावट कभी-कभी सामान्य चावल से थोड़ी अलग दिखाई देती है। इसी वजह से कई उपभोक्ताओं को पकाते या खाते समय ये दाने अलग महसूस होते हैं और लोग इन्हें “प्लास्टिक चावल” समझ लेते हैं। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ एक भ्रम और अफवाह है।
क्या ये दाने खाने के लिए सुरक्षित हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार ये दाने पूरी तरह खाद्य और सुरक्षित हैं। पानी में भिगोने पर ये नरम हो जाते हैं, जबकि प्लास्टिक ऐसा नहीं करता।
आयोडीन डालने पर इनका रंग नीला हो सकता है, जो यह साबित करता है कि ये अनाज से बने हैं। हालांकि योजना को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। FSSAI के अनुसार थैलेसीमिया या सिकल सेल एनीमिया के मरीजों को आयरन युक्त खाद्य पदार्थ डॉक्टर की सलाह से ही लेने चाहिए।
सरकार ने योजना पर क्या फैसला लिया?
केंद्र सरकार ने 27 फरवरी 2026 को इस योजना को फिलहाल अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है। एक अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक भंडारण के दौरान फोर्टिफाइड चावल में मौजूद कुछ पोषक तत्व कम हो सकते हैं।

