मुंबई: महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच बिजली की दरों को लेकर सियासी पारा गरमा गया है। एक ओर जहाँ महायुति सरकार ने 2030 तक बिजली दरों में कटौती का ऐतिहासिक फैसला लागू किया है, वहीं विपक्ष ने इसे जनता की आँखों में धूल झोंकने वाला कदम करार दिया है। इस फैसले ने राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं के बीच चर्चा के साथ-साथ एक बड़ा राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है।
विकास को मिलेगी नई गति
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और महावितरण के स्वतंत्र निदेशक विश्वास पाठक ने इस निर्णय को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) ने 2030 तक चरणबद्ध तरीके से कटौती के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। पाठक के अनुसार, “100 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले 70% घरेलू उपभोक्ताओं को अगले पांच वर्षों में 26% की बड़ी राहत मिलेगी।” साथ ही, सोलर ऑवर्स (सुबह 9 से शाम 5) के दौरान बिजली उपयोग पर मिलने वाली छूट को 8 पैसे से बढ़ाकर 85 पैसे प्रति यूनिट कर दिया गया है, जो उद्योगों और आम जनता के लिए बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा।
विपक्ष का पलटवार
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार के इन दावों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कटौती को “शुद्ध छलावा” बताते हुए कहा कि यह निर्णय केवल चुनाव जीतने के लिए रचा गया एक खेल है। वडेट्टीवार ने केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने जनता को लूटने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईंधन और बिजली की दरों में यह दिखावे की कटौती आम नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि केवल कॉर्पोरेट मित्रों और चुनाव में लाभ पाने के लिए की जा रही है।
निवेश बनाम महंगाई का मुद्दा
जहाँ विश्वास पाठक का कहना है कि बिजली की सस्ती दरें राज्य में निवेश को आकर्षित करेंगी और आर्थिक विकास को गति देंगी, वहीं विपक्ष इसे बढ़ती महंगाई से ध्यान भटकाने की कोशिश मान रहा है। वडेट्टीवार ने तर्क दिया कि अगर सरकार वास्तव में गंभीर होती, तो वह बहुत पहले ही करों में कटौती कर राहत दे सकती थी। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए 9.50 रुपए प्रति यूनिट की स्थिर दर को भी विपक्ष ने अपर्याप्त बताया है। आने वाले दिनों में बिजली की ये घटती दरें और उस पर होता यह सियासी घमासान चुनाव के मुख्य मुद्दों में से एक रहने वाला है। अब देखना यह होगा कि जनता सरकार के इस “राहत” वाले कार्ड पर भरोसा करती है या विपक्ष के “छलावा” वाले नैरेटिव पर।
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