मुंबई: लगातार विवादों में घिरी रहने वाली राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर को आखिरकार ढोंगी तांत्रिक कैप्टन अशोक खरात से जुड़े नाशिक सेक्स स्कैंडल की वजह से अपना पद गंवाना पड़ा। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सख्त आदेश के बाद चाकणकर ने अपनी पार्टी एनसीपी (अजीत पवार गुट) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को इस्तीफा सौंप दिया।
इसी बीच इस्तीफे के बाद पहली बार सामने आईं चाकणकर ने कहा कि उन्होंने अशोक खरात को गुरु माना था, लेकिन उसके कथित कृत्यों की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। मीडिया से बातचीत में रूपाली चाकणकर ने सफाई देते हुए कहा कि उनका परिवार वारकरी परंपरा से जुड़ा है और वर्षों से एक मंदिर ट्रस्ट से संबद्ध रहा है। इसी कारण वे और उनका परिवार खरात दंपति को गुरु मानते थे और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते थे। उन्होंने कहा कि वायरल हो रहे वीडियो 5-6 साल पुराने हैं और किसी व्यक्ति के भविष्य के कृत्यों का अंदाजा पहले से नहीं लगाया जा सकता।
निष्पक्ष जांच की मांग, DGP और CM को लिखा पत्र
चाकणकर ने बताया कि उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस महानिदेशक और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र सौंपा है। उनका कहना है कि कई लोगों के खरात के साथ फोटो हैं, लेकिन केवल उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जो एक महिला होने के नाते दुखद है।
विरोधियों का हमला, पद पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में विपक्ष ने चाकणकर पर तीखा हमला बोला। आरोप लगाया गया कि महिला आयोग जैसे संवेदनशील पद पर रहते हुए किसी ढोंगी बाबा से संबंध रखना पद की गरिमा के खिलाफ है।
विरोधियों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि आयोग की अध्यक्ष ही ऐसे विवादों में घिरी हों, तो पीड़ित महिलाओं को न्याय कैसे मिलेगा।
बढ़ते दबाव के बीच देना पड़ा इस्तीफा
लगातार बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के चलते मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चाकणकर को इस्तीफा देने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने सुनेत्रा पवार से मुलाकात कर अपनी बात रखी, लेकिन अंततः उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
SIT जांच में खुल रहे चौंकाने वाले खुलासे
नाशिक पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अशोक खरात के पास कई आपत्तिजनक वीडियो और बड़ी संपत्ति है। बताया जा रहा है कि 100 से अधिक महिलाओं के शोषण से जुड़े सबूत सामने आ सकते हैं।
आरोप लगाने वालों को कानूनी नोटिस की चेतावनी
चाकणकर ने कहा कि उनके खिलाफ झूठी जानकारी फैलाने वालों को कानूनी नोटिस भेजा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पहले भी एक खबर को लेकर पुलिस से जानकारी मांगी गई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया था।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बौछार
इस मामले पर विभिन्न दलों के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
राष्ट्रवादी की नेता रुपाली ठोंबरे-पाटील ने कहा कि चाकणकर के इस्तीफे से “आयोग पर लगा दाग साफ हुआ।”
ठाकरे गुट की सुषमा अंधारे ने इसे “हकालपट्टी” बताते हुए चाकणकर को सह-आरोपी बनाने की मांग की।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि इस्तीफे में कहीं भी गलती स्वीकार नहीं की गई, जो चिंताजनक है।
सह-आरोपी बनाने की उठी मांग
कुछ नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले में चाकणकर की भूमिका की भी जांच हो और जरूरत पड़े तो उन्हें सह-आरोपी बनाया जाए।
वीडियो लीक मामले में एक आरोपी हिरासत में
इस केस में वीडियो सामने लाने वाले नीरज जाधव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। उस पर पीड़िता को मॉर्फ वीडियो भेजने का आरोप है।

“व्यक्तिगत कारणों” का हवाला देकर दिया इस्तीफा
अपने इस्तीफे में चाकणकर ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है और अब तक मिले सहयोग के लिए आभार जताया है। हालांकि, विपक्ष इसे नैतिक जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बता रहा है।
