लघु और मध्यम उद्यम को भी मिलेगा बढावा..
मुंबई : बीकेसी में आयोजित “इंडिया बाय एमएसएमई” कार्यक्रम में कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ है। भारत को एक वक्त सोने की चिड़िया कहा जाता था, क्योंकि हर घर में छोटे-छोटे उद्योग हुआ करते थे। यह भारत की परंपरा छोटे उद्यमों से जुड़ी रही है। जब तक छोटे व्यापारी मजबूत नहीं होंगे, तब तक भारत भी मजबूत नहीं बन सकता। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक से 4,000 करोड़ रुपये की राशि मिली है, जिसका उपयोग छोटे उद्यमियों को समर्थन देने के लिए किया जाएगा। इस राशि उन लोगों को दिया जाएगा जो छोटे कारखाने स्थापित करना चाहते हैं।
भारत की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से बीकेसी में ‘इंडिया बाय एमएसएमई’ का आयोजन किया गया। यूग्रो कैपिटल के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक सचिंद्र नाथ और एटरनल कॉरपोरेट मीडिया के सीईओ आलोक रंजन तिवारी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत के रूप में सामने आया। कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, बैंकों, एनबीएफसी, फिनटेक कंपनियों, रेटिंग एजेंसियों, म्यूचुअल फंड्स और उद्योग जगत के दिग्गजों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र के योगदान, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा करना तथा एक समन्वित इकोसिस्टम की रूपरेखा तैयार करना था।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर रवि रंजन ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र देश में रोजगार सृजन का सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने बताया कि उद्यम पोर्टल पर 7.7 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं, जो लगभग 33 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत और कुल निर्यात में 45 प्रतिशत योगदान इस क्षेत्र से आता है। सिडबी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज मित्तल ने कहा कि पहली बार कुल क्रेडिट आउटस्टैंडिंग, क्रेडिट गैप से अधिक हो गई है, जो सकारात्मक संकेत है। उन्होंने बताया कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक आंदोलन, जीएसटी और स्टार्टअप संस्कृति ने एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने कहा कि यदि देश को 5 या 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल करना है, तो इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता देनी होगी। यूग्रो कैपिटल के संस्थापक सचिंद्र नाथ ने इसे एक राष्ट्रीय मिशन बताते हुए कहा कि यह पहल नीति-निर्माताओं, बैंकों, एनबीएफसी और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर एमएसएमई क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक समाधान विकसित करेगी। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और डेटा-आधारित वित्तीय मॉडल के माध्यम से इन संभावनाओं को साकार किया जा सकता है।
कार्यक्रम में देश के वित्तीय एवं कॉरपोरेट क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने बतौर विशिष्ट वक्ता सहभागिता की। इनमें उमेश रेवांकर, एग्जिक्यूटिव चेयरमैन, श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड; जसपाल सिंह बिंद्रा, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एवं डायरेक्टर, सेंट्रम कैपिटल; नवनीत मुनोट, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड; डी.पी. सिंह, डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर एवं ज्वाइंट सीईओ, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड; अमिष मेहता, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, क्रिसिल लिमिटेड; हरीश मेहता, संस्थापक चेयरमैन, नैसकॉम एवं एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, ऑनवर्ड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड; सौरभ नानावटी, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इनवेस्को एसेट मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड; वेंकट चलासानी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी); डॉ. अरुण सिंह, ग्लोबल चीफ इकोनॉमिस्ट, डन एंड ब्रैडस्ट्रीट; अपूर्व कुमार, यूनिट हेड – साउथ एशिया, प्राइवेट सेक्टर फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन ऑपरेशंस, एशियन डेवलपमेंट बैंक; तथा हर्ष मित्तल, हेड – मर्चेंट लेंडिंग, फोनपे शामिल रहे।

