मालेगांव: महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम में उपमहापौर और समाजवादी पार्टी की नेता शान-ए-हिंद के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने पर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारी विरोध के बाद प्रशासन ने शनिवार को तस्वीर हटा दी है, जिसके बाद अब इस पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
​हिंदुत्ववादी संगठनों का कड़ा विरोध
​विवाद की शुरुआत तब हुई जब उपमहापौर ने अपने कक्ष में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई। शुक्रवार को शिंदे सेना के पार्षदों और विभिन्न हिंदुत्ववादी संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम आयुक्त रवींद्र जाधव के कार्यालय के बाहर धरना दिया और उपमहापौर के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने शनिवार को खुद पहल कर तस्वीर को हटा दिया।
​उपमहापौर का रुख: ‘तस्वीर फिर लगेगी’
​तस्वीर हटाए जाने पर उपमहापौर शान-ए-हिंद ने सफाई दी कि शनिवार को छुट्टी होने के कारण कार्यालय मरम्मत कार्य के लिए तस्वीर निकाली गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि काम पूरा होने के बाद वे अपनी विचारधारा और संवैधानिक अधिकारों के तहत धर्मनिरपेक्ष नायकों की तस्वीरें फिर से लगाएंगी।
​बीजेपी पर कांग्रेस का पलटवार
​कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ पुराने उदाहरण साझा करते हुए बीजेपी पर ‘दोहरा मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया:
​2012: अकोला नगर निगम के हॉल का नाम ‘शेरे मैसूर टीपू सुल्तान’ रखने का प्रस्ताव बीजेपी ने ही दिया था।
​2013 व 2001: मुंबई और अंधेरी में टीपू सुल्तान के नाम पर मार्ग के प्रस्तावों में बीजेपी पार्षदों की सहमति थी।
​अन्य तर्क: सावंत ने याद दिलाया कि बीजेपी नेता बी.एस. येदियुरप्पा ने टीपू की मजार पर जाकर प्रशंसा की थी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी उनके शौर्य को सराहा था।
​शिवाजी महाराज से तुलना पर छिड़ा नया विवाद
​इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह शिवाजी महाराज ने स्वराज के लिए लड़ाई लड़ी, वैसे ही टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ वीरता दिखाई, इसलिए उन्हें समकक्ष माना जा सकता है।

​मुख्यमंत्री फडणवीस की तीखी प्रतिक्रिया
​मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस तुलना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ और ‘शर्मनाक’ करार दिया। उन्होंने कहा, ​”छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना करना पूरी तरह गलत है। शिवाजी महाराज ने स्वराज की स्थापना कर आम आदमी को मुक्त किया, जबकि टीपू सुल्तान का इतिहास अलग रहा है। कांग्रेस को इस बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।”

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