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सीजेआई ने समझाया ‘हमारी मुंबई बनाम उनकी मुंबई’ का अंतर! खारिज की कोलाबा में प्रस्तावित जेट्टी विरोधी याचिका

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मुंबई. सुप्रीम कोर्ट के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की खंडपीठ ने दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित रेडियो क्लब के पास प्रस्तावित यात्री जेटी और टर्मिनल सुविधा परियोजना के खिलाफ दायर याचिका मंगलवार को खारिज कर दी. भारत के मुख्य न्यायाधीश पदभार हाल ही में स्वीकार करने वाले मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने उपरोक्त याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को जबरदस्त फटकार भी लगाई. इस दौरान उन्होंने सामान्य मुंबईकरों की मुंबई और उच्चभ्र अमीरों की मुंबई का उदाहरण देते हुए याचिकाकर्ताओं की मानसिकता की भी तीखी आलोचना की.
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि मराठी में ‘आमची’ का अर्थ है हमारी और त्यांची का अर्थ ‘उनकी’ होता है. उन्होंने मुंबई के संदर्भ में आमची मुंबई का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘आमची मुंबई’ अर्थात जहां आम लोग रहते हैं, जबकि त्यांची मुंबई’ मतलब जहां अमीर, अभिजात वर्ग रहता है. उन्होंने कहा कि हमारी मुंबई कोलाबा में नहीं है. कोलाबा में केवल उनकी मुंबई है. ‘हमारी मुंबई’ मालाड, ठाणे, घाटकोपर जैसे क्षेत्रों में है.
ये था याचिकाकर्ताओं के वकीलों का कहना
यात्री जेटी परियोजना का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि यह ‘आमची मुंबई’ और ‘त्यांची मुंबई’ के बीच का झगड़ा है. याचिकाकर्ताओं के वकीलों का दावा था कि इस परियोजना को दो साल में पूरा करने की योजना है. यह वृहद परियोजना केवल समाज के एक विशेष वर्ग के लाभ के लिए लागू की जा रही है और इसे बिना किसी सार्वजनिक सुनवाई के आगे बढ़ाया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने की अहम टिप्पणी
गौरतलब हो कि उपरोक्त याचिका याचिकाकर्ता सहित कोलाबा के 400 से अधिक निवासियों के संगठन क्लीन एंड हेरिटेज कोलाबा रेजिडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर की गई थी. जिसे सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने खारिज करते हुए कहा, “हर कोई सीवेज उपचार संयंत्र चाहता है, लेकिन अपने घर के पीछे नहीं. जब शहर में कुछ अच्छा हो रहा होता है तो कोई विरोध करने सुप्रीम कोर्ट जाता है. क्या आप कोस्टल रोड के लाभों के बारे में जानते हैं? इससे दक्षिण मुंबई के एक व्यक्ति को 40 मिनट में वर्सोवा पहुंचने की सुविधा मिल गई है. जबकि पहले इसमें तीन घंटे लगते थे. पीठ ने कहा कि बंबई उच्च न्यायालय पहले ही इस मामले की सुनवाई कर रहा है. उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में उच्च न्यायालय को मानसून का मौसम समाप्त होने से पहले निर्णय लेने का सुझाव दिया है.

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