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परमबीर सिंह के “पाप का घड़ा” भर गया: अनिल देशमुख का बड़ा हमला

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लीलावती अस्पताल घोटाले में पूर्व पुलिस कमिश्नर पर गंभीर आरोप
मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शुक्रवार को मुंबई में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर जमकर हमला बोला। देशमुख ने आरोप लगाया कि परमबीर सिंह का “पाप का घड़ा” अब भर चुका है और उनके भ्रष्टाचार के मामले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं।
लीलावती अस्पताल में घोटाले का आरोप
देशमुख ने बताया कि मुंबई के प्रतिष्ठित लीलावती अस्पताल के प्रशासन ने परमबीर सिंह को भ्रष्टाचार और गलत आचरण के आरोपों में अपमानजनक तरीके से पद से हटा दिया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कमिश्नर का कार्यकाल पूरा करने के बाद परमबीर सिंह लीलावती अस्पताल के निदेशक मंडल में शामिल हुए थे। देशमुख के अनुसार, अस्पताल के ट्रस्टियों और डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि परमबीर सिंह ने पदोन्नति के लिए प्रत्येक डॉक्टर से 25-25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इन गंभीर शिकायतों के चलते अस्पताल प्रशासन ने उन्हें संचालक पद से हटाने का फैसला किया।
एंटीलिया बम कांड का जिक्र
अनिल देशमुख ने एंटीलिया बम कांड का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे गृह मंत्री थे, तब उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी गाड़ी मिली थी। उस समय परमबीर सिंह मुंबई पुलिस कमिश्नर थे और उन्होंने जांच शुरू की थी।
देशमुख ने आरोप लगाया कि परमबीर सिंह जांच में सरकार को गुमराह कर रहे थे, जिसके कारण जांच उनके हाथ से लेकर एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) को सौंप दी गई। एटीएस की जांच में उनके खिलाफ गंभीर संकेत मिलने पर उनकी कम महत्वपूर्ण पद पर बदली कर दी गई और बाद में उन्हें निलंबित भी किया गया।
100 करोड़ के झूठे आरोप
देशमुख ने दावा किया कि बर्खास्तगी से बचने के लिए परमबीर सिंह ने उन पर 100 करोड़ रुपये वसूलने का झूठा आरोप लगाया था। इसके बाद देशमुख ने खुद जांच की मांग की थी। तदुपरांत राज्य सरकार ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जज न्यायमूर्ति चांदीवाल की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया। देशमुख के अनुसार, न्यायमूर्ति चांदीवाल ने करीब 11 महीने जांच की और कुल छह बार समन जारी किए, लेकिन परमबीर सिंह एक बार भी आयोग के सामने पेश नहीं हुए। देशमुख ने कहा कि गिरफ्तारी के डर से परमबीर सिंह फरार हो गए और बाद में अपने वकील के जरिए एक हलफनामा जमा कराया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि देशमुख के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
पूर्ण जांच की मांग
अनिल देशमुख ने लीलावती अस्पताल के मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि परमबीर सिंह की भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति अब फिर से उजागर हो गई है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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