मुंबई : महानगर की सड़कों और फुटपाथों पर अवैध रूप से कब्जा जमाने वाले फेरीवालों के मुद्दे पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने उन शिकायतों को गंभीरता से लिया है, जिनमें कहा गया था कि कई फेरीवाले और उनके सहायक बांग्लादेशी या विदेशी नागरिक हो सकते हैं।
बीएमसी और पुलिस को तुरंत जांच के निर्देश
हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और मुंबई पुलिस को सभी फेरीवालों और उनके सहायकों की पहचान की तत्काल जांच करने का आदेश दिया है। अगर जांच में कोई अवैध प्रवासी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे उसके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
3 महीने में पूरी करनी होगी वेरिफिकेशन प्रक्रिया
न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि मुंबई में काम कर रहे सभी फेरीवालों और उनके सहायकों की पहचान अगले 3 महीनों के भीतर जांची जानी चाहिए। इसके लिए विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं।
लापरवाही पर अधिकारियों की होगी जिम्मेदारी तय
कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि इस आदेश का पालन नहीं हुआ, तो संबंधित बीएमसी अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट की अवमानना के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इससे प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
केवल 99 हजार फेरीवालों को ही अनुमति
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुंबई में फिलहाल करीब 99,000 फेरीवाले ही निर्धारित मानकों के अनुसार व्यवसाय करने के पात्र हैं। इन्हें भी केवल तय स्थानों पर ही काम करने की अनुमति होगी। इसके अलावा किसी अन्य को फुटपाथ पर दुकान लगाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश
यदि कोई स्टॉल या फेरीवाला पैदल यात्रियों या यातायात में बाधा बनता है, तो उसे तुरंत हटाने के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ आम नागरिकों के लिए हैं और उन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बीएमसी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
हाईकोर्ट ने बीएमसी और मुंबई पुलिस को मिलकर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान सभी स्थायी और अस्थायी स्टॉल्स की जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे पैदल यात्रियों के रास्ते में बाधा न बनें। साथ ही हर व्यक्ति के नागरिकत्व की भी जांच की जाएगी।
फेरीवालों की पहचान करो सुनिश्चित : सरकार-प्रशासन को मुंबई हाईकोर्ट का सख्त आदेश
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