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फर्जी सिम कार्ड गिरोह का भंडाफोड: मजदूरों के आधार से चलाया करोड़ों का साइबर फ्रॉड

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मुंबई: मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो उत्तर प्रदेश और बिहार से काम की तलाश में आए मज़दूरों के आधार कार्ड और बायोमेट्रिक डेटा का गलत इस्तेमाल कर फर्जी सिम कार्ड सक्रिय करता था। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय साइबर अपराधी धोखाधड़ी के लिए कर रहे थे।
मुंब्रा निवासी सुलतान अंसारी (42) को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दूरसंचार विभाग की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यूनिट ने साइबर पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक चिमाजी आढाव को जब अहम जानकारी दी, तब इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
ऐसे हुई शुरुआत
मुंबई के वरली इलाके और आसपास के क्षेत्रों में कई मोबाइल नंबर अचानक बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय रोमिंग के लिए इस्तेमाल होने लगे। प्रारंभिक जांच में पता चला कि इन नंबरों का उपयोग साइबर ठगी से जुड़े अपराधों में हो रहा था। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर सुलतान को दबोचा।
आरोपी की कार्यप्रणाली
पूछताछ में सुलतान ने खुलासा किया कि उसके पास सिम खरीदने आने वाले अधिकतर लोग यूपी और बिहार के मजदूर थे, जिनके पास मुंबई में रहने का कोई वैध पता नहीं था। इसका फायदा उठाते हुए वह मजदूरों के आधार कार्ड का डेटा निकालकर डिजिटल तरीके से उसमें हेरफेर करता था. वह मूल पते की जगह मुंबई का फर्जी पता डाल देता था. जब कोई मजदूर एक सिम लेने आता था तो सुलतान उस मजदूर के अंगूठे के निशान से दो सिम एक्टिवेट कर लेता था. मजदूर को एक सिम देकर दूसरा खुद रख लेता था. बहुत से मजदूरों को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनके नाम पर एक अतिरिक्त नंबर चालू हो चुका है।
फरवरी से दिसंबर 2024 तक का खेल
जांच में सामने आया कि फरवरी से दिसंबर 2024 के बीच सुलतान ने इसी तरीके से 100 से अधिक अतिरिक्त सिम कार्ड सक्रिय किए। ये फर्जी सिम कार्ड वह अपने साथी जीशान को सौंप देता था, जो हर सिम कार्ड के बदले 500 रुपए देता था।
अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से जुड़ाव
जीशान के जरिए ये सिम कार्ड विदेश में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाए जाते थे। अपराधियों ने इन भारतीय नंबरों से वाट्सऐप और टेलीग्राम पर अकाउंट बनाए, ताकि लोगों को लगे कि संपर्क करने वाला व्यक्ति भारत में ही है। इसी आड़ में लोगों को निवेश योजनाओं, ऑनलाइन कामों और अन्य प्रलोभनों का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई।
टेलीकॉम कंपनियों पर भी उठे सवाल
इस मामले ने मोबाइल सेवा प्रदाताओं की वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक स्थानीय एजेंट द्वारा फर्जी पते के आधार पर इतने बड़े पैमाने पर सिम कार्ड कैसे एक्टिवेट हो गए, यह जांच का विषय बना हुआ है। फिलहाल पुलिस आरोपी सुलतान के साथी जीशान कामले की तलाश में जुटी है।

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