विधानसभा में CM Devendra Fadnavis ने दी जानकारी
जजों की नियुक्ति के लिए High Court से लगातार हो रहा है पत्राचार
मुंबई : फास्ट ट्रैक कोर्टों की सुस्त चाल का असर लंबित मामलों के निपटारे पर पड़ रहा है। राज्य में मंजूर 138 फास्ट ट्रैक कोर्टों में से अभी केवल 58 ही शुरू हो सके हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि बाकी अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार लगातार मुंबई हाई कोर्ट (Bombay High Court) से संपर्क में है।
जजों की नियुक्ति न्यायपालिका के अधिकार में
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार पूरी तरह न्यायपालिका के पास है। सरकार ने पिछले एक वर्ष में मुख्य न्यायाधीश से कई बार मुलाकात और आधिकारिक पत्राचार कर नियुक्तियां जल्द करने का अनुरोध किया है।
खाली पदों से बढ़ रही देरी
विधानसभा अध्यक्ष Rahul Narwekar (राहुल नार्वेकर) ने कहा कि निचली न्यायपालिका में बड़ी संख्या में रिक्त पद होने से मामलों के निपटारे में देरी हो रही है। उन्होंने पुणे के मकोका कोर्ट (MCOCA Court) समेत कई आपराधिक मामलों के वर्षों से लंबित रहने का मुद्दा भी उठाया।
नए कोर्ट की मांग पर होगा फैसला
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में महाराष्ट्र में सत्र और अतिरिक्त जिला अदालतों का विस्तार हुआ है। नए न्यायालयों की जरूरत लंबित मामलों की संख्या के आधार पर तय की जाती है। पुणे या अन्य स्थानों से मांग आने पर हाई कोर्ट की समिति की सिफारिश के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
जल्द पूरी होगी नियुक्ति प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाई कोर्ट ने सरकार को जानकारी दी है कि न्यायाधीशों की भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रक्रिया पूरी होते ही सभी मंजूर फास्ट ट्रैक कोर्टों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ नियमित अदालतें ही फास्ट ट्रैक मामलों की सुनवाई कर रही हैं, इसलिए अलग फास्ट ट्रैक कोर्टों की जरूरत है।
फास्ट ट्रैक कोर्टों की सुस्त चाल : अब तक 138 में से 58 ही हुए शुरू
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