मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगा
दहिसर पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह के सक्रिय आरोपी को दबोचा
मुंबई : वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बनकर 71 वर्षीय महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी देकर 4.50 लाख रुपये की ठगी करने वाले साइबर ठग को दहिसर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पुलिस अधिकारी होने का झांसा देकर महिला को व्हॉट्सऐप कॉल के जरिए कथित तौर पर नजरबंद रखा और उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल करने के बाद रकम एक बैंक खाते में जमा कराने के लिए मजबूर किया। दहिसर पुलिस की तकनीकी और प्रत्यक्ष जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली।
दहिसर पूर्व, मुंबई में रहने वाली 71 वर्षीय महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर दहिसर पुलिस थाने में 4 जुलाई 2026 को अपराध क्रमांक 985/2026 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(क) और 66(ड) के तहत मामला दर्ज किया गया।
खुद को बताया पुलिस अधिकारी
शिकायत के मुताबिक, 2 जुलाई से 3 जुलाई 2026 के बीच अज्ञात आरोपियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से महिला से संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजेश मिश्रा (Rajesh Mishra) बताया। उन्होंने महिला के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज होने की बात कही और गिरफ्तारी का डर दिखाया।
व्हॉट्सऐप कॉल पर रखा नजरबंद
साइबर ठगों ने महिला को डराकर व्हॉट्सऐप कॉल के जरिए लगातार अपने संपर्क में रखा। इस दौरान उनसे उनके बैंक खातों और उनमें मौजूद रकम की जानकारी हासिल की गई। इसके बाद आरोपियों ने कार्रवाई से बचाने का झांसा देकर महिला को 4 लाख 50 हजार रुपये एक बैंक खाते में जमा करने के लिए मजबूर किया।
महिला ने आरोपियों के कहने पर यह रकम इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) में महाकाल इंटरप्राइजेस (Mahakal Enterprises) के नाम से संचालित खाते में जमा की।
ई-मेल से आरोपी तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम जिस बैंक खाते में जमा हुई थी, उससे जुड़े ई-मेल आईडी को एक आरोपी ने तैयार किया था। ठगी के दौरान उक्त ई-मेल आईडी को आरोपी के मोबाइल से लॉगिन किए जाने के तकनीकी साक्ष्य भी पुलिस को मिले। तकनीकी और प्रत्यक्ष जांच के आधार पर दहिसर पुलिस ने धिरजकुमार केसाराम प्रजापती (Dhirajkumar Kesararam Prajapati), उम्र 28 वर्ष, निवासी कामाठीपुरा, मुंबई को गिरफ्तार किया।
आरोपी की भूमिका सामने आई
पुलिस के अनुसार, आरोपी धिरजकुमार केसाराम प्रजापती ने अपने मोबाइल फोन में तैयार किए गए ई-मेल आईडी से लिंक इंडसइंड बैंक खाते में 4.50 लाख रुपये की ठगी की रकम प्राप्त की थी। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित समय में आरोपी के मोबाइल नंबर से उक्त ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी और उसके साथियों ने साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग तरीकों से ठिकाने लगाया। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने किया सावधान
दहिसर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठग अक्सर व्हॉट्सऐप या सोशल मीडिया के जरिए पुलिस अधिकारी बनकर संपर्क करते हैं। वे किसी व्यक्ति के नाम पर पुलिस केस या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला होने का दावा कर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। पुलिस ने नागरिकों से ऐसे किसी भी दबाव या धमकी में नहीं आने और अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई आर्थिक लेन-देन नहीं करने की अपील की है। साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930, cybercrime.gov.in या sancharsaathi.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई
यह कार्रवाई गजानन देशमाने (Gajanan Deshmane), पुलिस उपायुक्त, उत्तर विभाग-3, मुंबई, जयराज रणवरे (Jayraj Ranaware), सहायक पुलिस आयुक्त, दहिसर विभाग और सर्जेराव पाटील (Sarjerao Patil), वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के मार्गदर्शन में की गई। जांच टीम में वैशाली श्रावगी (Vaishali Shravagi), पुलिस निरीक्षक, संदीप पांगणे (Sandeep Pangane), सहायक पुलिस निरीक्षक, आकाश पाटील (Akash Patil), पुलिस उपनिरीक्षक और श्रुती मालपोटे (Shruti Malpote), पुलिस उपनिरीक्षक सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

