मुंबई: एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी इन दिनों अपने ‘स्लम टूरिज़्म’ के कारण चर्चा में है। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां सिर्फ विदेशी पर्यटक ही नहीं, बल्कि पेडर रोड और मलबार हिल जैसे इलाकों के उच्चभ्रू लोग भी धारावी का जीवन करीब से देखने पहुंच रहे हैं। दो घंटे के ‘स्लम टूर’ के लिए विदेशी पर्यटकों से प्रति व्यक्ति करीब 15 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं।
स्लम टूरिज़्म’ यानी झुग्गी बस्तियों का भ्रमण के दौरान पर्यटकों को धारावी की तंग गलियों, घरों, छोटे उद्योगों और रोजमर्रा के संघर्षों से रूबरू कराया जाता है। हाल ही में एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी पत्रिका की रिपोर्ट में सामने आया कि कुछ स्थानीय युवक खुद गाइड बनकर ऐसे टूर चला रहे हैं।
दो घंटे में 75 हजार की कमाई
रिपोर्ट के अनुसार, धारावी के रहने वाले ओंकार ढमाले नामक युवक ने पांच विदेशी पर्यटकों को दो घंटे का टूर कराया और कुल 75 हजार रुपए कमाए। यानी प्रति व्यक्ति 15 हजार रुपए। भारतीय पर्यटकों के लिए यह दर कम है, जो करीब 1,500 से 7,000 रुपये के बीच बताई जा रही है।
पहले संगठित, अब निजी व्यवसाय
2006 में ‘पॉवर्टी टूरिज़्म’ का जिक्र सामने आया था। उस समय यह टूर संगठित संस्थाओं और प्रशिक्षित गाइड्स के जरिए होते थे, जिनका उद्देश्य सामाजिक कार्य और शिक्षा में मदद करना था। लेकिन अब यह एक तरह का घरेलू व्यवसाय बन गया है, जहां थोड़ी-बहुत अंग्रेज़ी जानने वाला कोई भी खुद को गाइड बताकर टूर कराने लगा है।
धारावी में बढ़ता आकर्षण क्यों?
पर्यटक अक्सर धारावी के लेदर मार्केट और छोटे उद्योगों को देखने आते हैं। यहां की तीन फुट चौड़ी गलियां, रीसाइक्लिंग उद्योग, कुम्हारवाड़ा जैसे इलाके और शहर के बीचोंबीच बसी यह बस्ती लोगों को आकर्षित करती है। कई घरों में एसी जैसी सुविधाएं देखकर पर्यटक हैरान भी हो जाते हैं।
‘गरीबी देखना या समझना?’
कुछ विशेषज्ञ इसे ‘वॉयरिज़्म’ यानी दूसरों की निजी जिंदगी में झांकना मानते हैं। वहीं ‘खाकी टूर्स’ के संस्थापक भारत गोठोसकर का कहना है कि सही संदर्भ और संवेदनशीलता के साथ कराया गया टूर सिर्फ गरीबी नहीं, बल्कि धारावी की मेहनत, उद्योग और सामाजिक संरचना को समझने का जरिया बन सकता है।
फोटो को लेकर रहिवाशों का विरोध
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी नाराजगी बिना अनुमति फोटो खींचने को लेकर है। कई परिवारों ने साफ मना किया है, क्योंकि धारावी का नाम अक्सर गरीबी और दुख से जोड़ा जाता है। कुछ इलाकों में तो पर्यटकों का प्रवेश तक रोक दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि फोटो से पहले अनुमति लेना और स्थानीय सम्मान बनाए रखना गाइड की जिम्मेदारी है।
आगे क्या?
धारावी के पुनर्विकास के बाद यहां की जीवनशैली और आजीविका बदल सकती है। ऐसे में स्लम टूरिज़्म पर निर्भर युवाओं को नए रास्ते तलाशने पड़ सकते हैं। सवाल यही है—क्या यह पर्यटन समझ और संवाद का माध्यम बनेगा या सिर्फ गरीबी देखने का तमाशा?
Related Posts
Add A Comment
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
© 2024 Tah Ki Baat. All Rights Reserved. Created and Maintained by Creative web Solution
