87 हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों की होगी जांच
मुंबई. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में घुसपैठ कर चुके अवैध विदेशी नागरिकों को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के कथित रैकेट की जांच के लिए मुंबई पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। प्रारंभिक जांच में बड़ी संख्या में जन्म प्रमाणपत्र संदिग्ध तरीके से जारी किए जाने की बात सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अधिकारियों, एजेंटों व लाभार्थियों की भूमिका की जांच करेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चलेगी जांच
एसआईटी का नेतृत्व संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) करेंगे। टीम में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (स्पेशल ब्रांच), अपराध शाखा के उपायुक्त (डिटेक्शन) समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बंद हो चुके सिस्टम का इस्तेमाल कर किस तरह हजारों जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए और इन दस्तावेजों का उपयोग किन लोगों ने किया।
सोमैया ने किया 87,347 जन्म प्रमाणपत्र घोटाले का दावा
बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया का दावा है कि यह “87,347 जन्म प्रमाणपत्र घोटाला” है, जिसमें बंद हो चुके एसएपी सिस्टम का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज जारी किए गए। उनके अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा सीआरएस पोर्टल लागू किए जाने के बावजूद पुराने सिस्टम के जरिए अवैध तरीके से जन्म प्रमाणपत्र बनाए जाते रहे। सोमैया ने आरोप लगाया कि नाम की स्पेलिंग सुधारने और जन्मतिथि बदलने जैसे कारणों का हवाला देकर हजारों प्रमाणपत्र जारी किए गए। उन्होंने कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद महानगरपालिका (बीएमसी) प्रशासन ने अब तक इन प्रमाणपत्रों को रद्द करने की कार्रवाई नहीं की।
बीएमसी की जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की आंतरिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच 87,347 जन्म प्रमाणपत्र पुराने एसएपी सिस्टम के माध्यम से जारी किए गए। इनमें वर्ष 2024 में 30,507, वर्ष 2025 में 49,705 और वर्ष 2026 में 7,135 प्रमाणपत्र शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इसी अवधि में अधिकृत सीआरएस प्रणाली के जरिए केवल 33,700 प्रमाणपत्र जारी हुए। जांच में सबसे अधिक संदिग्ध प्रमाणपत्र एम ईस्ट वार्ड (मानखुर्द-देवनार), एल वार्ड (कुर्ला), के वेस्ट वार्ड (अंधेरी पश्चिम), ई वार्ड (भायखला) और एच वेस्ट वार्ड (खार-बांद्रा पश्चिम) में पाए गए।
महापौर रितु तावड़े ने दिए कड़े निर्देश
मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने महानगरपालिका अधिकारियों को महाराष्ट्र सरकार के निर्देशों के अनुसार सभी 87,348 संदिग्ध जन्म प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों, एजेंटों और इन प्रमाणपत्रों से लाभ लेने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है। रितु तावड़े ने कहा कि मुंबई पहले से ही भारी जनसंख्या दबाव झेल रही है और अवैध घुसपैठियों की मौजूदगी शहर की व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे लोगों को किसी भी हालत में संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
फरवरी में दो पूर्व अधिकारियों पर दर्ज हुई थी एफआईआर
इस मामले में फरवरी महीने में मुंबई पुलिस ने बीएमसी के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के दो पूर्व अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना जन्म प्रमाणपत्रों को मंजूरी दी। हालांकि, अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ सरकार का अभियान जारी
महायुति सरकार राज्य में अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है। पिछले वर्ष मुंबई पुलिस ने एक हजार से अधिक अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा था। वहीं, इस वर्ष अवैध विदेशी नागरिकों को निर्वासन से पहले रखने के लिए एक डिटेंशन सेंटर भी स्थापित किया गया।

