Hindi News / Crime / Featured

कश्मीरी सरला भट्ट को मिलेगा इंसाफ : 36 साल बाद दाखिल हुआ 737 पन्नों का आरोपपत्र

Article Top Ad

यासीन मलिक के घर समेत 8 जगह 2025 में हुई थी छापेमारी
नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर की नर्स सरला भट्ट (Kashmiri pandit Nurse Sarala Bhatt) की हत्या का मामला 36 साल बाद फिर चर्चा में है। राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने इस मामले में 737 पन्नों का आरोपपत्र विशेष अदालत में दाखिल किया है। इसके साथ ही लंबे समय से बंद पड़े इस मामले की कानूनी प्रक्रिया फिर शुरू हुई है।
अपहरण के बाद की गई थी हत्या
सरला भट्ट अनंतनाग की रहने वाली थीं और श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में नर्स थीं। उन्हें नौकरी छोड़ने और कश्मीर से चले जाने की धमकियां मिल रही थीं। 14 अप्रैल 1990 को उनका हॉस्टल से अपहरण कर लिया गया। 19 अप्रैल 1990 को श्रीनगर में उनका शव मिला। जांच के अनुसार हत्या से पहले उनके साथ गंभीर अत्याचार किए गए थे।
2025 में फिर खुली जांच
उपराज्यपाल प्रशासन ने 1990 में कश्मीरी पंडितों की हत्या से जुड़े मामलों को दोबारा खोलने का फैसला किया था। इसके बाद SIA ने अगस्त 2025 में सरला भट्ट हत्याकांड की नई जांच शुरू की।
यासीन मलिक के घर समेत 8 जगह छापेमारी
12 अगस्त 2025 को SIA ने श्रीनगर में 8 स्थानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई सरला भट्ट हत्याकांड की जांच के तहत की गई। इस दौरान जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के पूर्व प्रमुख यासीन मलिक के आवास सहित संगठन के कई पूर्व कमांडरों के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। अप्रैल 1990 में हुई इस हत्या के मामले में SIA की यह पहली बड़ी छापेमारी थी।
आरोपपत्र में तीन लोगों के नाम
SIA के आरोपपत्र में अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी और गुलाम मोहम्मद टपलू के नाम शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार तीनों की मृत्यु हो चुकी है।
परिवार को भी मिली थीं धमकियां
सरला भट्ट की हत्या के बाद उनके परिवार को अंतिम संस्कार में शामिल न होने की धमकियां भी दी गई थीं। उस समय निगीन पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
कश्मीरी पंडितों के पलायन का दौर
पुलिस की 2008 की रिपोर्ट के अनुसार 1989 से शुरू हुए आतंकवादी हमलों में 209 कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई थी। इनमें 109 हत्याएं वर्ष 1990 में हुई थीं। हालांकि, कश्मीरी पंडित संगठनों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक थी। इसी दौर में बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ा।

Article Inline Ad
Article Bottom Ad