16 वायरस ने बैक्टीरिया को किया खत्म
वैज्ञानिकों की उपलब्धि ने दुरुपयोग को लेकर बढ़ाई चिंता
मुंबई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया अब वायरस के डिजाइन तक पहुंच गई है। अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) और आर्क इंस्टीट्यूट (Arc Institute) के वैज्ञानिकों ने एआई (AI) की मदद से ऐसे नए वायरस डिजाइन किए, जो पहले प्रकृति में मौजूद नहीं थे। प्रयोगशाला में तैयार किए गए 300 डिजाइन में से 16 वायरस बैक्टीरिया को नष्ट करने में सफल रहे। यह खोज एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट संक्रमणों के इलाज की नई उम्मीद जगाती है, लेकिन साथ ही AI के जरिए भविष्य में खतरनाक जैविक डिजाइन तैयार किए जाने की आशंका ने वैज्ञानिकों की चिंता भी बढ़ा दी है।
करोड़ों जीनोम से सीखा
शोध में एवो-1 (Evo 1) और एवो-2 (Evo 2) AI मॉडल का इस्तेमाल किया गया। इन मॉडलों को करोड़ों प्राकृतिक जीनोम पर प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद इन्हें ΦX174 और उससे जुड़े वायरस के जीनोम पर केंद्रित किया गया।
जिस तरह ChatGPT अगले शब्द का अनुमान लगाकर वाक्य तैयार करता है, उसी तरह Evo मॉडल डीएनए की अगली जेनेटिक संरचना का अनुमान लगाकर नए वायरस डिजाइन तैयार करता है।
300 डिजाइन की लैब में जांच
AI मॉडल ने हजारों संभावित वायरस डिजाइन तैयार किए। वैज्ञानिकों ने इनमें से करीब 300 डिजाइन चुने और उनके डीएनए को प्रयोगशाला में तैयार किया। परीक्षण के दौरान पेट्री डिश में बैक्टीरिया के बीच बने साफ क्षेत्र इस बात का संकेत थे कि कुछ डिजाइन किए गए वायरस सक्रिय होकर बैक्टीरिया को नष्ट कर रहे हैं। कुल 16 वायरस बैक्टीरिया को खत्म करने में सफल रहे। वैज्ञानिकों के मुताबिक इन वायरस को बैक्टीरिया को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया था।
एंटीबायोटिक का नया विकल्प
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में इस तकनीक की मदद से उन बैक्टीरियल संक्रमणों का इलाज किया जा सकता है, जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं। ऐसे संक्रमणों की बढ़ती संख्या दुनिया के सामने बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। AI से डिजाइन किए गए वायरस इस समस्या से निपटने का एक नया रास्ता खोल सकते हैं।
सफलता से ज्यादा सुरक्षा की चिंता
हालांकि वैज्ञानिक उपलब्धि के साथ इसके गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता भी सामने आई है। Evo मॉडल ओपन-सोर्स है और इसे डाउनलोड किया जा सकता है। विशेषज्ञों को डर है कि AI की जैविक डिजाइन क्षमता आगे बढ़ने के साथ इसका दुरुपयोग भी संभव है।
फिलहाल यह तकनीक छोटे और अपेक्षाकृत सरल जीनोम तक सीमित है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों ने माना है कि भविष्य में बड़े और जटिल वायरस डिजाइन करना पूरी तरह असंभव नहीं होगा।
दुनिया को चाहिए सख्त नियम
AI की मदद से वायरस डिजाइन करने की क्षमता ने विज्ञान के साथ सुरक्षा की नई चुनौती भी खड़ी कर दी है। ऐसे में वैज्ञानिक निगरानी, जिम्मेदार इस्तेमाल और वैश्विक स्तर पर स्पष्ट जैव-सुरक्षा नियम बेहद जरूरी हो गए हैं। AI से तैयार ये वायरस फिलहाल चिकित्सा के लिए उम्मीद की किरण हैं, लेकिन यही तकनीक भविष्य में खतरे का कारण न बने, इसके लिए अभी से सावधानी बरतना जरूरी है।
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