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इंस्टाग्राम पर एडमिशन का झांसा : 1.35 करोड़ की ठगी में 10 गिरफ्तार

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पवई पुलिस ने दो फर्जी कॉल सेंटर का किया पर्दाफाश
मुंबई: नामांकित शिक्षण संस्थानों में एडमिशन दिलाने के नाम पर इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के जरिए देशभर के अभिभावकों और छात्रों से ठगी करने वाले गिरोह का पवई पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पुणे में संचालित दो फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 1 करोड़ 35 लाख 27 हजार रुपये का सामान और ठगी के लिए इस्तेमाल बैंक खातों में जमा 24 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।
IIIT हैदराबाद में प्रवेश का झांसा
मामला 47 वर्षीय शिकायतकर्ता ग्रेमी पिटर स्वामी (Greemy Peter Swamy) से जुड़ा है। उनके बेटे को IIIT हैदराबाद में एडमिशन दिलाने के नाम पर इंस्टाग्राम अकाउंट techorbit1111 के जरिए संपर्क किया गया था। आरोपियों ने एडमिशन कराने का भरोसा देकर उनसे कुल 16.50 लाख रुपये लिए। इसके बाद पवई पुलिस थाने में 17 जुलाई 2026 को मामला दर्ज किया गया।
बैंक खाते और मोबाइल से मिला सुराग
शिकायत मिलते ही पुलिस ने संबंधित बैंक से संपर्क कर ठगी की रकम वाले खाते को फ्रीज कराया। तकनीकी जांच में पता चला कि ठगी की रकम से पांच मोबाइल फोन खरीदे गए थे। मोबाइल लोकेशन और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने 14 अगस्त को पुणे के विमाननगर-लोहगांव स्थित निऑन होम्स में छापा मारा। यहां संदिग्ध मोबाइल और दस्तावेजों के साथ आरोपी मिले।
दो जगह चल रहे थे फर्जी कॉल सेंटर
जांच में सामने आया कि आरोपी दो स्थानों से फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। निऑन होम्स के कमरा नंबर 204, 404 और 603 से पांच मोबाइल, 18 सिम कार्ड, विभिन्न कॉलेजों और संस्थानों के नाम व मोबाइल नंबर वाली दस्तावेजी जानकारी तथा दो कारें बरामद की गईं। खराड़ी के सिटी विस्टा बिल्डिंग स्थित दूसरे कॉल सेंटर से चार मोबाइल, दो हार्ड डिस्क, एचपी लैपटॉप, जियोबुक, सात डेबिट कार्ड और पांच सिम कार्ड जब्त किए गए। आरोपियों की तलाशी में 13 अन्य मोबाइल भी मिले।
2019 से चल रहा था ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार आरोपी इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया के दौरान इंस्टाग्राम विज्ञापनों के जरिए छात्रों और अभिभावकों से संपर्क करते थे। इसके बाद फर्जी सिम और व्हाट्सऐप चैट के माध्यम से उनकी पसंद के कॉलेज की जानकारी हासिल की जाती थी। आरोपी कॉलेज प्रशासन से पहचान होने का झूठा दावा कर विश्वास पैदा करते और टोकन मनी, एडवांस या पहले वर्ष की फीस के नाम पर रकम लेते थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह वर्ष 2019 से इस तरीके से लोगों को ठग रहा था।
छह और मामले सामने आए
जांच में मुंबई, नागपुर, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक से जुड़े कुल छह मामले सामने आए हैं। पुलिस को 30 मोबाइल नंबरों की सूची के साथ PICT, NSUT और DTU जैसे संस्थानों से संबंधित कॉलेजों की जानकारी भी मिली है। इसके आधार पर अन्य ठगी के मामलों का पता चलने की संभावना है। 15 अगस्त को अदालत में पेश किए गए आरोपियों को 20 अगस्त 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
पुलिस टीम की कार्रवाई
यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त देवेन भारती (Deven Bharti), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अभिनव देशमुख (Abhinav Deshmukh), पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावडे (Datta Nalawade) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में पवई पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक आत्माजी सावंत (Atmaji Sawant), निरीक्षक सुशांत बडगर (Sushant Badgar), निरीक्षक जयदीप गोसावी (Jaideep Gosavi) तथा साइबर टीम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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