2010 से बंद प्रक्रिया फिर शुरू होगी
मुंबई. राज्य सरकार ने सहकारी आवास संस्थाओं को सरकारी जमीन देने के लिए संशोधित नीति तय की है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सुझाव पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल से तैयार इस नीति में जमीन आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है. 2010 से बंद जमीन आवंटन अब सीधे लिलाव के जरिए किया जाएगा.
30 साल के लिए मिलेगी जमीन
नई नीति के तहत जिलाधिकारी उपलब्ध सरकारी भूखंडों की सूची तैयार करेंगे. इसके बाद सार्वजनिक विज्ञापन के जरिए तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया से लिलाव होगा. मुंबई शहर और उपनगरों में बाजार मूल्य का 2.5 प्रतिशत तथा राज्य के अन्य हिस्सों में 5 प्रतिशत आधार मूल्य रखा जाएगा. जमीन 30 साल के पट्टे पर दी जाएगी. इसके बाद ही उसे भोगवटादार वर्ग-1 में बदलने की पात्रता होगी.
विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण
भूखंडों में सामान्य वर्ग के लिए 40 प्रतिशत, राज्य कर्मचारी और स्थानीय निकाय कर्मचारियों के लिए 15 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और घुमंतू जनजातियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण रहेगा. पत्रकार, कलाकार, साहित्यकार और खिलाड़ियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण होगा. केंद्र कर्मचारी, पूर्व सैनिक, जनप्रतिनिधि, स्वतंत्रता सेनानी, दिव्यांग और EWS वर्ग के लिए भी अलग-अलग आरक्षण तय किया गया है.
आय सीमा में बदलाव
सातवें वेतन आयोग को ध्यान में रखते हुए आय सीमा और फ्लैट के कारपेट एरिया में बदलाव किया गया है. ग्रुप-डी के लिए 300 वर्ग फुट और 50 हजार रुपये तक मासिक आय, जबकि ग्रुप-सी के लिए 450 वर्ग फुट और एक लाख रुपये तक आय सीमा होगी. ग्रुप-बी के लिए 650 वर्ग फुट और डेढ़ लाख रुपये तक आय सीमा रखी गई है. ग्रुप-ए के लिए 1076 वर्ग फुट क्षेत्र होगा और आय सीमा लागू नहीं होगी.
डमी फ्लैट पर सख्ती
हर संस्था में कम से कम 20 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग और 5 प्रतिशत दिव्यांग सदस्य रखना अनिवार्य होगा. पति-पत्नी को संयुक्त सदस्य बनाया जाएगा. डमी या बेनामी फ्लैट मिलने पर जिलाधिकारी उसे बिना मुआवजे के सरकार के कब्जे में ले सकेंगे. पुराने लंबित प्रस्ताव बंद किए जाएंगे, लेकिन जिन मामलों में पहले ही आशय पत्र जारी हो चुका है, उन्हें नई पट्टा दरों के अनुसार जमीन दी जाएगी.
सरकारी जमीन के आवंटन की नई नीति : सहकारी आवास संस्थाओं के लिए पारदर्शी लिलाव
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