मुंबई : महाराष्ट्र राज्य मंत्रिमंडल ने गुरुवार (5 मार्च 2026) एक कड़े धर्मांतर विरोधी विधेयक को मंजूरी दे दी। भाजपा विधायक और महायुति सरकार के मंत्री नितेश राणे ने विधानभवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए इसे राज्य के लिए “ऐतिहासिक दिन” बताया।
राणे ने बताया कि यह कानून मध्यप्रदेश और गुजरात के धर्मांतर विरोधी कानूनों से भी अधिक कठोर है। इसके तहत जबरदस्ती या प्रलोभन देकर धर्मांतर कराना गैर जमानतीय अपराध होगा और दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाएगा। बजट सत्र में दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) में यह विधेयक पारित कराकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही यह कानून पूरे महाराष्ट्र में लागू हो जाएगा।
मिशनरी गतिविधियों पर रोक
नितेश राणे ने कहा कि ईसाई मिशनरियों और अन्य संगठनों पर आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सेवा या शिक्षा के नाम पर सामूहिक धर्मांतर कराने के आरोप लगते रहे हैं। नया कानून ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाएगा।
“घर वापसी” को सरकारी संरक्षण
विधेयक में “घर वापसी” के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे स्वेच्छा से हिंदू धर्म में लौटने वालों को पूर्ण सरकारी समर्थन और सुरक्षा मिलेगी।
लव जिहाद पर भी सख्ती
राणे ने जोर देकर कहा कि यह कानून “लव जिहाद” को भी रोकेगा और माताओं-बहनों को धोखे से धर्मांतरण से बचाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि अब महाराष्ट्र में कोई धर्मांतरण का साहस नहीं करेगा। संवैधानिक वैधता पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून पूरी तरह संवैधानिक ढांचे के भीतर है।
7 साल की सजा का प्रावधान
इस कानून की धारा 14 के तहत अवैध धर्मांतरण में लिप्त संस्थाओं पर प्रतिबंध और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। धारा 9 में अपराधों और उनकी सजाओं का उल्लेख है। धारा 9 की उपधारा (4) के अनुसार दोषी पाए जाने पर 7 साल कारावास और 5 लाख रुपए जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
हाई कोर्ट के फैसले का भी स्वागत
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राणे ने मुंबई हाई कोर्ट के उस फैसले की सराहना की, जिसमें हवाई अड्डों जैसी संवेदनशील जगहों पर खुले नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाली याचिका को खारिज किया गया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों की बजाय मस्जिदों का उपयोग नमाज के लिए किया जाना चाहिए।

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