कांग्रेस टॉपर लिस्ट साझा कर उठाए गंभीर सवाल
उच्च शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल से मांगा जवाब
मुंबई : महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (एमएचटी-सीईटी) शैक्षणिक सत्र 2025-26 के परीक्षा परिणाम विवादों के घेरे में आ गए हैं. कांग्रेस पार्टी ने इस परीक्षा के टॉपर्स की सूची में भारी विसंगतियों का दावा करते हुए महायुति सरकार पर जोरदार हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर परीक्षा परिणामों का प्रामाणिक डेटा साझा करते हुए विपक्षी नेताओं ने पूरी चयन प्रक्रिया और परिणाम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
10वीं-12वीं में कम अंक, एंट्रेंस में ऐतिहासिक प्रदर्शन
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुरुजीत सिंह सप्पल ने सोशल नेटवर्किंग साइट ‘एक्स’ पर महास्टेट सीईटी सेल की प्रोविजनल मेरिट लिस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए इस पूरे मामले का खुलासा किया. उनके द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की सीईटी परीक्षा में कुल 7 छात्रों ने पूरे 100 परसेंटाइल हासिल किए हैं, जबकि 13 छात्रों को 99.999 परसेंटाइल प्राप्त हुए हैं. हालांकि, जब इन सर्वोच्च अंक पाने वाले टॉपर्स के 10वीं और 12वीं कक्षा के शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच की गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए.
टॉपर लिस्ट की प्रमुख संदिग्ध विसंगतियां:
12वीं के अंकों में भारी गिरावट: मेरिट सूची के अनुक्रमांक (सीरियल नंबर) 1, 2, 5, 9, 13 और 15 वाले छात्रों के 12वीं कक्षा के फिजिक्स, रसायन (केमेस्ट्री) और मैथ (पीसीएम) के अंक महज 41% से 49% के बीच सिमटे हुए हैं.
10वीं का रिकॉर्ड भी सामान्य: अनुक्रमांक 1, 2, 5, 9 और 15 के विद्यार्थियों को उनकी 10वीं की परीक्षा में भी PCM विषयों में मात्र 36% से 45% के बीच ही अंक मिले थे.
अन्य संदिग्ध क्रमांक: इसी प्रकार, मेरिट सूची में शीर्ष पर काबिज अनुक्रमांक 6 और 14 के विद्यार्थियों के अंक भी क्रमशः 45% और 40% दर्ज हैं।
कांग्रेस ने पूछा यह चमत्कार कैसे हुआ?
इन संदिग्ध आंकड़ों को आधार बनाते हुए गुरुजीत सिंह सप्पल ने राज्य की शिक्षा प्रणाली और परीक्षा नियंत्रण बोर्ड को आड़े हाथों लिया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या व्यावहारिक और तार्किक रूप से यह कभी संभव है कि जो छात्र अपनी बोर्ड परीक्षाओं (10वीं और 12वीं) में न्यूनतम या बेहद औसत अंक लेकर उत्तीर्ण हुए हों, वे अचानक राज्य की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षा में देश या राज्य स्तर पर 100 परसेंटाइल लाकर टॉप कर जाएं?
सचिन सावंत का चंद्रकांत पाटिल पर तीखा हमला
इस खुलासे के तुरंत बाद, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सचिन सावंत ने सप्पल के ट्वीट को मराठी भाषा में री-ट्वीट करते हुए राज्य सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा किया. सावंत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित महायुति के तमाम शीर्ष नेताओं को इस टॉपर सूची को बारीकी से देखने की सलाह दी है. सचिन सावंत ने सूबे के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल को सोशल मीडिया पर टैग करते हुए तीखा सवाल दागा है. सावंत ने कहा, “10वीं और 12वीं में अत्यंत सामान्य प्रदर्शन करने वाले छात्र अचानक सीईटी जैसी बेहद कठिन व स्पर्धात्मक परीक्षा में 100 परसेंटाइल कैसे ला सकते हैं? चंद्रकांत दादा पाटिल जी, इस विषय पर आपका क्या मत है, यह अब महाराष्ट्र की जनता को स्पष्ट रूप से पता चलना चाहिए.”
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
इस राजनीतिक घमासान और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही मेरिट लिस्ट के बाद महाराष्ट्र के लाखों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच हड़कंप मच गया है. दिन-रात मेहनत करने वाले मेधावी छात्रों ने भी अब इस परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर संदेह जताना शुरू कर दिया है. विपक्ष ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे और योग्य छात्रों के साथ कोई अन्याय न हो.
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