नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा को शानदार जीत मिली है. राज्य में एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) गठबंधन को 200 से अधिक सीटें मिली हैं. वहीं, आरजेडी और कांग्रेस समेत महागठबंधन को केवल 35 सीटों से संतोष करना पड़ा. इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय में भाषण देते हुए कांग्रेस पोर जोरदार हमला बोला और कांग्रेस के सहयोगी दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ जुड़े मित्र दलों को सावधान रहना चाहिए. नहीं तो खुद का पुनरागमन करने के लिए वे आपकी वोट बैंक को निगल लेगी. राजनीतिक विशेषज्ञों इसे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए एक चेतावनी मान रहे हैं.
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ नकारात्मक राजनीति करती है. कभी ईवीएम पर शंका, कभी चुनाव आयोग को गालियां, तो कभी वोट चोरी का झूठा आरोप. आज कांग्रेस ‘मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस’ यानी ‘एमएमसी’ बन गई है. कांग्रेस के अंदर ही एक अलग गुट बन रहा है, जो इस नकारात्मक राजनीति से परेशान है. मुझे शंका है कि भविष्य में कांग्रेस पार्टी का बहुत बड़ा विभाजन हो सकता है. पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के मित्र दल अब समझने लगे हैं कि कांग्रेस अपनी नकारात्मक राजनीति में सबको डुबो रही है. कांग्रेस एक परजीवी है, जो मित्र दलों की वोट बैंक निगलकर अपना पुनरागमन करना चाहती है. उन्होंने कहा कि आज बिहार में आरजेडी को सांप (कांग्रेस) ने डस लिया है. जल्द ही आरजेडी और कांग्रेस के बीच झगड़ा खुलकर सामने आएगा. पीएम मोदी के इस बयान से विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में दरार पैदा करने की भाजपा की रणनीति साफ झलक रही है.
उद्धव पर डाले डोरे!
मुंबई महानगर पालिका (बीजेपी) के बहुप्रतिक्षित चुनाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, जनवरी 2031 से पहले होने हैं. मुंबई में हर हाल में अपना महापौर बनाने को बीजेपी एस बार प्रतिबद्ध लेकिन उद्धव और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे के एक साथ आने तथा उस गठबंधन में क्रांगेस के शामिल होने से बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिर सकता है. माना जा रहा है कि उपरोक्त आशंकाओं के पीएम मोदी ने एक रणनीति के तहत विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी (मविआ) में फूट डालने के मकसद से उपरोक्त बयान दिया है. क्योंकि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. गठबंधन में मतभेद बार-बार उजागर हो रहे हैं. महायुति में शामिल उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी के नेताओं के विवाद भी बीजेपी को बार-बार परेशानी में डाल रहे हैं. इन सबके बीच अंदरखाने उद्धव की शिवसेना से फिरे से गठबंधन की इच्छा बीजेपी के कई नेता व्यक्त कर चुके हैं. पिछले कुछ महीनों से ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि बीजेपी-शिवसेना यूबीटी में फिर से गठबंधन हो सकता है. इसी मंशा के तहत पीएम मोदी की यह टिप्पणी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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